आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में नियमों की अनदेखी हो रही है। बिल्डरों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाले एडीए अफसर खुद ही इसे भूल गए हैं। अफसरों को न तो नियमों की परवाह है और न ही कार्रवाई का डर है। अगर यकीन नहीं आता है तो ताजनगरी फेज-दो योजना को ही ले लीजिए। एडीए की यह योजना वर्ष 1990 की है। इसमें सेक्टर ए से ई तक हैं। 200 हेक्टेअर की इस योजना में दस साल में 100 करोड़ रुपये का बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) एडीए के खाते में जमा हुआ है। सेक्टर बी-टू हो या फिर अन्य कोई भी। अभी तक इन क्षेत्रों में सीवर और पानी की लाइन नहीं बिछाई गई है। यहां तक कि जल निकासी के समुचित इंतजाम नहीं हैं।

अगर प्लाॅट बिक्री की बात की जाए तो एडीए को 700 करोड़ रुपये की आमदनी हुई है। एडीए को रोड, नाले-नालियां, स्ट्रीट लाइट, सीवर और पानी की लाइन बिछानी चाहिए। हर साल करोड़ों रुपये का ईडीसी जमा होने के बाद भी एडीए अफसरों ने इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया है। पांच से बीस साल पूर्व रोड का निर्माण किया गया था। अधिकांश लिंक रोड जर्जर पड़ी हैं। नालियों का कनेक्शन नाले से नहीं किया गया है। सीवर और पानी की लाइन न होने के कारण लोग परेशान हैं। ताजनगरी-दो में दस बड़े और 12 छोटे पार्क हैं। अधिकांश पार्कों को सही तरीके से विकसित नहीं किया गया है।

22 हजार परिवार कर रहे निवास

ताजनगरी फेज-दो में 22 हजार परिवार निवास कर रहे हैं। हर माह पांच से दस नए मकान का निर्माण शुरू हो रहा है। परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

निरीक्षण के नाम पर रस्म अदायगी

छह माह के भीतर एडीए अफसरों ने पांच निरीक्षण किए हैं। हर निरीक्षण में रोड, नाली-नाला, सीवर और पानी की लाइन सहित अन्य पर चर्चा की गई, लेकिन इसका कोई प्रस्ताव तैयार नहीं हुआ है। हाल यह है कि पार्श्वनाथ पंचवटी के सामने 43 मीटर की रोड बंद पड़ी है। कुछ यही हाल एडीए हाइट्स का भी है। रोड का निर्माण लंबे समय से नहीं हुआ है।

क्या कहते हैं बिल्डर और अफसर

ताजनगरी फेज-दो में बाह्य विकास शुल्क ठीक तरीके से खर्च हो जाए तो क्षेत्र का विकास और भी तेजी से होगा। बैठकों में कई बार यह मुद्दा उठाया जा चुका है।

-निखिल अग्रवाल, निदेशक गणपति इंफ्राटेक

ताजनगरी फेज-दो में एडीए को करोड़ों रुपये का ईडीसी मिला है। इसे क्षेत्र के विकास के लिए खर्च करना चाहिए।

-शोभिक गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रेडाई उप्र शाखा

ताजनगरी फेज-दो में विकास कार्यों पर जल्द फोकस किया जाएगा। दस साल के भीतर जो भी कार्य हुए हैं, उसकी फाइलें तलब की गई हैं।

-डाॅ. राजेंद्र पैंसिया, उपाध्यक्ष एडीए

Edited By: Nirlosh Kumar