नोएडा, आनलाइन डेस्‍क। राज्‍यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी सुप्रीमों अखिलेश यादव ने आखिरी पलों में पहले से तय माना जा रहा डिंपल यादव का टिकट काट दिया। इसे सियासी दांव कहें या मजबूरी। अखिलेश यादव ने अपने पत्ते खोलते ही तीसरे प्रत्याशी को लेकर फंसे पेंच को खोलते हुए आरएलडी के संयुक्‍त प्रत्‍याशी जयंत चौधरी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि बुधवार को सपा की ओर से निर्दलीय प्रत्‍याशी कपिल सिब्बल व पार्टी उम्‍मीदवार जावेद अली के नाम तय हो गए थे। दोनों ने नामांकन भी कर दिया।

जयंत चौधरी के सामने दिक्कत यह थी कि वह रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में वह सपा के सिंबल पर राज्‍यसभा चुनाव में उतरते तो इसका गलत संदेश भी जा सकता था।

अब डिंपल यादव के सामने क्‍या विकल्‍प

अगर जयंत चौधरी राजी नहीं होते तो अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव को तीसरे प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार देते। पार्टी ने डिंपल के नामांकन पत्र भरवाने की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं। डिंपल यादव को साइड कर अखिलेश ने वर्ष 2024 को ध्यान में रखते हुए जयंत को राज्यसभा भेजने की रणनीति बना ली। अब डिंपल यादव का लोकसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। वे आजमगढ़ लोकसभा सीट पर अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकती हैं। उक्‍त सीट अखिलेश यादव की ओर से खाली की गई थी। यूपी चुनाव 2022 में वे मैनपुरी के करहल विधानसभा सीट से खड़े हुए और जीते। इसके बाद उन्होंने आजमगढ़ से लोकसभा सदस्यता छोड़ दी।

पहले भी सपा से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं जावेद

जावेद अली खान पहले भी वर्ष 2014 से 2020 तक सपा से राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। 31 अक्टूबर, 1962 को उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जन्मे जावेद अली जामिया मिलिया इस्लामिया से छात्रसंघ के महासचिव भी रह चुके हैं। अखिलेश ने राज्यसभा की तीन सीटों में से एक सीट जावेद को देकर अल्पसंख्यक समुदाय को साधने की कोशिश की है। जावेद रामगोपाल यादव के करीबी हैं। सपा से जुड़ने के बाद पार्टी ने इन्हें 2005 में मुरादाबाद का जिलाध्यक्ष बनाया था। वह 2007 के विधानसभा चुनाव में ठाकुरद्वारा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। वर्तमान में जावेद अली खान सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हैं।

कपिल सिब्बल को समर्थन देकर अखिलेश ने चला बड़ा दांव

अखिलेश यादव ने कपिल सिब्बल को समर्थन देकर बड़ा दांव चला है। इस कदम से एक तरफ आजम खां की नाराजगी दूर होगी साथ ही मुस्लिम समुदाय के बीच भी बड़ा संदेश जाएगा। कपिल सिब्बल की बड़े मुस्लिम नेताओं के बीच स्वीकार्यता इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने तीन तलाक, सीएए, एनआरसी व हिजाब जैसे मुस्लिम समाज से जुड़े मसलों में पैरवी की थी। तीन तलाक के मसले पर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की तरफ से कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोर्चा संभाला था। इसके अलावा कपिल सिब्बल के आने से सपा को भी एक बड़ा अधिवक्ता मिल गया है। पार्टी को कोई दिक्कत आती है तो कानूनी मोर्चे पर कपिल सिब्बल संभाल लेंगे।

Edited By: Vijay Kumar