यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नया नोएडा में Plot खरीदने वाले हो जाएं सावधान, 80 जगहों पर काटी जा रही है अवैध कॉलोनियां; जल्द चलेगा बुलडोजर
नोएडा में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है जिससे औद्योगिक विकास खतरे में है। 80 से ज्यादा ...और पढ़ें

HighLights
- औद्योगिक विकास के लिए प्राधिकरण को नहीं मिल पाएगी जमीन
- नया नोएडा क्षेत्र में तेजी से बसाई जा रही अवैध कॉलोनियां
धर्मेंद्र चंदेल, नोएडा। अवैध निर्माण पर लगाम नहीं लगी तो नया नोएडा सपना ही बनकर रह जाएगा। जिस तेजगति से क्षेत्र में अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है, उस पर लगाम नहीं लगी तो एक वर्ष के अंदर अधिकांश जमीन पर कॉलोनियां ही नजर आएंगी। औद्योगिक विकास के लिए प्राधिकरण को जमीन भी नहीं मिल पाएगी।
क्षेत्र में 80 से अधिक स्थानों पर अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है। कॉलोनाइजर इनमें छोटे-छोटे प्लॉट बनाकर बेच रहे हैं। प्लॉटों को काफी महंगी दरों पर बेचा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि नियमों से अनजान लोग नया नोएडा नाम से प्रभावित होकर वहां आशियाना बनाने की चाहत में प्लॉट खरीद रहे हैं।
प्लॉट बेचकर भाग जाएंगे कॉलोनाइजर
उन्हें यह भी नहीं पता कि सभी कॉलोनियां अवैध है। इनमें न केवल बिजली, पानी, सड़क, पार्क एवं पानी की निकासी के लिए नालियां आदि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी, बल्कि प्राधिकरण की तलवार भी इन पर हमेशा लटकी रहेगी।
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कॉलोनाइजर प्लॉट बेचकर भाग जाएंगे। बाद में प्राधिकरण की कार्रवाई का सामना खरीदारों को कराना पड़ेगा। उन्हें मकान हटाने के लिए नोटिस मिलेंगे। प्राधिकरण मकानों को ध्वस्त करेगा तो आर्थिक नुकसान भी होगा।
कम बजट वालों के लिए नया नोएडा पहली पंसद
दरअसल नोएडा, ग्रेटर नोएडा में प्लॉटों की दर आसमान छू रही है। आम जनमानस की पहुंच से इन शहरों में मकान खरीदना दूर हो गया है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी कमोवेश यही स्थिति है। कम आय वर्ग वाले जो लोग एनसीआर में आशियाना बनाना चाहते हैं, उनके लिए इस समय नया नोएडा पहली पंसद बन गया है। इसका मुख्य कारण इसका नया नोएडा नाम होना है।
नया नोएडा नाम से आर्कषित होकर यहां लोग प्लॉट खरीदने आ रहे हैं। अभी यहां पर जमीन की दर भी नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के मुकाबले कम है। कॉलोनाइजर इसी का फायदा उठाकर लोगों की जमा पूंजी को ठग रहे हैं। जारचा, बिसहाड़ा, प्यावली, खटाना, चिटहैरा, घुनबास, ऊंचा अमीरपुर गालंद, गुलावठी, मसूरी व नई बस्ती आदि गांवों में सर्वाधिक अवैध कॉलोनी बसाई जा रही है।
प्राधिकरण अवैध कॉलोलियों में नहीं कराता विकास
कालोनाइर लोगों को यह कहकर अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने के लिए आकर्षित करते हैं कि भविष्य में प्राधिकरण यहां विकास कराएगा। प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं कराता है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में जितनी भी अवैध कॉलोनी बनी है, किसी में भी प्राधिकरणों ने विकास कार्य नहीं कराए हैं। कॉलोनियों में रहने वाले लोग विकास कार्यों के लिए प्राधिकरण के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन प्राधिकरण अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं करता है।
सिर्फ प्राधिकरण को है प्लॉट बेचने का अधिकार
शहर के गठन की अधिसूचना जारी होने और अधिसूचित क्षेत्र घोषित होने के बाद सिर्फ प्राधिकरण ही प्लॉट आवंटित कर सकता है। बाकी किसी को भी प्लॉट बेचने का अधिकार नहीं है। कॉलोनाइजर यह कहकर लोगों को ठग रहे हैं कि जमीन में किसानों के नाम दर्ज है।
उक्त जमीन को प्राधिकरण ने नहीं लिया है। इसलिए अधिगृहीत न होने के कारण इस पर कॉलोनी बसाई जा रही है। जबकि, हकीकत यह है कि अधिग्रहण होने तक किसान का नाम भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज रहता है। अधिग्रहण के बाद किसान का नाम अभिलेखों से हटाकर प्राधिकरण का दर्ज कर दिया जाता है।
21 हजार हेक्टेयर भूमि पर बनना है नया नोएडा
नया नोएडा के गठन की अधिसूचना 18 अक्टूबर 2024 कोई हुई थी। 80 गांवों की करीब 21 हजार हेक्टेयर भूमि पर नया नोएडा बनाना है। यह विशेष निवेश क्षेत्र होगा। इसमें इंड्रस्टी को जमीन आवंटित की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की होगी।
अवैध निर्माण को सख्ती से रोका जाएगा। शीघ्र कॉलोनियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू होगी। -- - सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिरकण
