नई दिल्ली (अमोद कुमार)। कार एयर प्यूरीफायर, रूम एयर प्यूरीफायर तो हम सब ने देखा-सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने खुले आसमान के नीचे हवा को साफ कर देने वाली किसी मशीन या तकनीक के बारे में देखा-सुना है, नहीं ना! हमने भी कभी नहीं सुना थाI बंद इलाके की हवा साफ करने वाली मशीन (एयर प्यूरीफायर) की बात तो समझ में आती है, जहां एक निश्चित दायरे में मौजूद और बंद क्षेत्र के हवा को साफ किया जाता है I मगर खुले आसमान के नीचे, बीच सड़क पर और सार्वजनिक जगहों पर लगातार बहते हवा को भला कैसे साफ किया जा सकता है? ये सोचकर ही रोमांच पैदा हो जाता है, लेकिन ये एक सच होता सपना हैI

दरअसल, लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को मात देने के लिए एक अनोखी तकनीक पर आधारित विशिष्ट मशीन का निर्माण किया गया हैI ये खोज की है कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के वायुमंडलीय रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ मैथ्यू जॉनसन नेI सालों की कड़ी मेहनत के बाद डॉ मैथ्यू और उनकी टीम ने एयर डायनामिक्स पर आधारित एक नई तकनीक ईजाद किया है जिसके जरिये खुले वातावरण में भी बह रहे विषाक्त और जहरीले पदार्थ से लैस हवा को तकनीक के जरिये प्रदूषण मुक्त हवा में तब्दील कर दिया जाता हैI

एयरहेवन टेक्नोलॉजी में एयर डायनामिक्स पर आधारित लगभग 30 मीटर व्यास का ये गोलाकार संरचना उपर से पूरी तरह खुला हैI इसमें चारों ओर से लगभग 4 हाई पावर स्पेशल फिल्टर लगे हैंI ये विशेष फिल्टर ही इस हवा में मौजूद प्रदूषण को अपनी ओर खींच लेता हैI खास ढंग से बने गोलाकार संरचना और इसमें लगे विशेष फिल्टर के जरिये संरचना के अंदर और बाहर दोनों तरफ फैले हुए विषैले तत्वों/हवा को सोख लेता है लिहाजा संरचना के अंदर रहने वालों को तो स्वच्छ हवा मिलती ही है बाहर और आसपास का क्षेत्र भी प्रदूषण मुक्त हो जाता हैI

 

(एयरहेवन में प्रयुक्त एयर फिल्टर (चिमनी) जो हवा में फैले विषाक्त कणों को सोख लेता है)

(दिल्ली में लगाई गयी एयरहेवन की पहली इकाई)

इस बावत पर्यावरण-तकनीक के क्षेत्र में काम करने वाली विश्व की 2 कंपनियों ने हाथ मिलाया हैI लंदन की एवरजेन और डेनमार्क की एयरलैब्स ने मिलकर विश्व की प्रथम स्वच्छ वायु क्षेत्र वाली अनोखी तकनीक “एयरहेवन” बनाने का दावा किया है। दिलचस्प बात यह है कि “एयरहेवन” के जरिए हवा को साफ करने वाली तकनीक की पहली बार नुमाइश के लिए देश की राजधानी दिल्ली को चुना गया। दो हफ्ते तक चले पायलट टेस्टिंग का सत्यापन नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के गैस और मेट्रोलोजी विभाग अपने स्तर पर कर रहा हैI

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक प्रोफेसर मैथ्यू जॉनसन ने जागरण से कहा- “हमने लगभग असंभव को संभव करने में सफलता पायी हैI हमारी टीम दिल्ली में पिछले कई दिनों से हवा की गुणवत्ता की निगरानी कर रही है और एयरहेवन को जहां लगाया गया है वहां की वायु में आश्चर्यजनक ढंग से 70% प्रदूषण में कमी आई हैI राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की गैस मेट्रोलोजी डिपार्टमेंट भी वायु गुणवत्ता की स्वतंत्र रूप से जाँच कर रहा हैI

खुले वातावरण में बह रहे हवा को कैसे साफ करता है “एयरहेवन”

• एयरहेवन वास्तुशिल्प का एक ऐसा अनोखा नमूना है जो विशेष ढंग से हवा के रुख को नियंत्रित करने के लिए “लॉ ऑफ़ फ्लूइड डायनामिक्स” के आधार पर काम करता हैI

• खुली जगह पर एक विशेष आकार का ढांचा तैयार कर लगाया जाता हैI

• उच्च कार्यक्षमता युक्त कम्प्यूटिंग और दक्ष एयर फिल्टर के सम्मिश्रण पर आधारित इसका डिजाइन हैI

• अनोखी एयरलैब्स टेक्नोलॉजी के तहत वायुमंडलीय केमिस्ट्री और एयरफ्लो इंजीनियरिंग का अनोखा संयोजनI

• नैनो पार्टिकल्स के संयोजन वाली विशिष्ट ड्यूअल-फिल्टर सिस्टम का उपयोग किया जाता हैI

• हवा से (NOx पार्टिकल्स) नाइट्रोजन ऑक्साइड निकालता हैI

• हवा से (SOx) सोडियम ऑक्साइड हटाता हैI

• हवा से (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड को दूर करता हैI

• हवा से ओजोन गैस (O3) को हटाता हैI

• हवा से 97-99% सूक्ष्म कण और रासायनिक गैस को दूर करने का दावा हैI

दरअसल इसमें प्रयुक्त “सिटी-ट्री” टेक्नोलॉजी पहले से ही लंदन के कई बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया है, ताकि शहर के वायु-प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकेI ”एयरहेवन” के निर्माता दो कंपनियों में से एक एवेरजेन का दावा है कि लंदन में मिली सफलता के बाद अब समूचे ब्रिटेन में “सिटी-ट्री” लगाने का काम शुरू हो गया हैI कंपनी के पास शहरी प्रदूषित हवा को साफ करने वाली विश्व की पहली बायोटेक फिल्टर- “सिटी-ट्री” का एक्सक्लूसिव लाइसेंस प्राप्त हैI इनका दावा है कि एक “सिटी ट्री” मशीन लगभग 270 पेड़ के बराबर प्रदूषित हवा को साफ कर ऑक्सीजन देती हैI

(एयरहेवन में प्रयुक्त सिटी-ट्री टेक्नोलॉजी)

(लंदन के पिक्कैडिली सर्कस में लगा सिटी-ट्री)

“एयरहेवन” की दूसरी निर्माता कंपनी एयरलैब्स का एक प्रोडक्ट “एयरबब्बल”(Airbubbl) पहले से ही बाजार में उपलब्ध हैI “एयरबब्बल” वाहनों के अंदर फैले प्रदूषण को साफ करने के लिए लगाया जाता है इसे कार एयरक्लीनर, बस-ट्रक एयरक्लीनर के तौर पर जाना जाता हैंI इस कंपनी ने पहली बार लंदन में बस स्टैंड से लेकर पार्क तक विभिन्न जगहों पर बड़े स्तर पर आउटडोर एयर क्लीनर लगाया थाI वायु प्रदूषण को समझने और उसे दूर करने में प्रयुक्त सेंसर टेक्नोलॉजी और एयरफ्लो मॉडलिंग इसकी खास विशेषता हैI

(एयरहेवन में प्रयुक्त सेंसर टेक्नोलॉजी जिसके जरिये गुणवत्ता की जाँच की जाती है)

इसके लॉन्चिंग के मौके पर एवेरजेन के संस्थापक और सीईओ सुखबीर सिंह सिद्धू ने जागरण से कहा- “हरेक दिन वायु प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता की वजह से हमारे सेहत पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव की खबरें पढ़ने को मिलती हैI इस समस्या का हल ढूंढने का प्रयास हम साल 2016 से ही कर रहे हैंI हमें इस बात की बेहद ख़ुशी है कि अपनी पार्टनर कंपनी एयरलैब्स के साथ मिलकर हमने विश्व में पहली बार ऐसा प्रयोग करने में सफलता पायी है जिसके जरिये सार्वजनिक स्थान पर भी खुले में स्वच्छ हवा पाया जा सकता है”I

हालांकि, इस तकनीक की जानकारी निश्चित तौर पर देश और दुनिया में लोगों का उत्साह बढ़ा रही है मगर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये तकनीक आम आदमी को कितनी महंगी या कितनी सस्ती उपलब्ध हो पाती हैI

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Posted By: Shilpa Srivastava

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