नई दिल्ली (टेक डेस्क)। भारत में आधार डाटाबेस की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हैकर्स अनलिमिटेड आधार आईडी बना सकते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि आधार डाटाबेस में एक सॉफ्टवेयर पैच के जरिए सेंध लगाई गई है। इससे हैकर्स सिक्योरिटी फीचर को बंद कर सकते हैं।

जानें क्या है मामला:

यह मामला सही है या नहीं इसे लेकर हफिंगटनपोस्ट ने विस्तृत जांच की जिसमें यह पाया गया कि आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर को सही में हैक किया गया है। इससे मल्टीपल आईडी जनरेट की जा सकती हैं। इस खबर को हफिंगटनपोस्ट ने ग्लोबल सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के जरिए वेरिफाई किया है। खबरों के मुताबिक, यह हैक एक पैच द्वारा किया गया है जिसके तहत आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर को दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एक बार पैच आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर वाले कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाए तो कोर्ई भी मल्टीपल आधार आईडी बना सकता है। यही नहीं, सिक्योरिटी प्रोटोकॉल में छेड़खानी भी कर सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा:

इस पैच की मदद से आधार सॉफ्टवेयर को पाकिस्तान या सीरिया में बैठे लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आतंकवादी अनलिमिटेड आधार आईडी बना पाएंगे और बिना किसी परेशानी के भारत में घुस पाएंगे। आपको बता दें कि यह पैच हजारों वॉट्सऐप ग्रुप्स पर न्यूनतम 2,500 रुपये में उपलब्ध है। नेशनल क्रिटिकल इंफोर्मेशन इंस्फ्रास्क्चर प्रोटेक्शन सेंटर और UIDAI को इस मामले को लेकर सूचित कर दिया गया है लेकिन उनकी तरफ से अभी कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

इससे पहले फ्रांसीसी सुरक्षा विशेषज्ञ इलियट एंडरसन ने UIDAI से सवाल किया था कि उसका हेल्पलाइन नंबर लोगों के फोन में बिना उनकी जानकारी के कैसे सेव हो गया है। इस मामले को लेकर काफी विवाद भी हुआ था। इलियट एंडरसन ने ट्वीट कर कहा है, “मैं दोहराता हूं कि कोई भी चीज ऐसी नहीं है, जिसे हैक न किया जा सके। यह आधार पर भी लागू होती है। कभी भी बहुत देर नहीं होती है। हैकर्स को धमकी देने के बजाए उनसे बात कीजिए।”

क्या होता है पैच?

पैच को एक बंडल कहा जा सकता है जो सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के फंक्शन को बदलने का काम करता है। आधार एनरोलमेंट सिस्टम को ऑपरेटर की बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जरुरत होती है। इसी जरुरत को पैच बदल देता है। यानी हैकर इस पैच के जरिए केवल लॉगइन कर आधार आईडी बनाना शुरू कर सकता है। आपको बता दें कि पैच IRIS स्कैनर के सटीकता स्तर (accuracy level) को भी कम कर देता है जिससे किसी भी फोटोग्राफ से आधार आईडी बनाई जा सकती है। इसके अलावा पैच सॉफ्टवेयर के इन-बिल्ट जीपीएस क्षमता को भी बंद कर देता है जिससे UIDAI या फिर कोई और एजेंसी यह कभी नहीं जान पाएंगे की फेक आईडी बनाई गई हैं या नहीं। हालांकि, पैच का इस्तेमाल हमेशा नुकसान करने के लिए नहीं होता है। कंपनियां अपने मौजूदा प्रोग्राम्स में छोटे-छोटे अपडेट्स के लिए भी पैच का इस्तेमाल करती हैं।

यह भी पढ़ें:

आसुस और फ्लिपकार्ट ने की साझेदारी, इन स्मार्टफोन्स पर मिल रहा बंपर डिस्काउंट

Vivo V11 Pro के ये पावरफुल 5 फीचर्स Oppo F9 Pro को दे रहे मात, पढ़ें डिटेल्स

Jio यूजर्स को अब हर जगह मिलेगा 4G नेटवर्क, जल्द शुरू होगी सैटेलाइट सेवा

 

Posted By: Shilpa Srivastava