नई दिल्ली, टेक डेस्क। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने वायर्ड ब्रॉडबैंड (Wired Braodband) की मिनिमम डाउनलोड स्पीड को वर्तमान 512 Kbps से रिवाइज कर 2 Mbps कर दिया है, और पूरे देश में हाई स्पीड फिक्स्ड लाइन इंटरनेट कनेक्टिविटी (Internet Connectivity) को आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी ऑफर करने वाली कंपनियों को लाइसेंस शुल्क में छूट जैसे प्रोत्साहन का सुझाव दिया है।

 200 रुपए का कैशबैक देने का सुझाव

दूरसंचार नियामक ट्राई ने मंगलवार को कई उपायों की सिफारिश की, जिसमें इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और कनेक्शन की गति बढ़ाने के लिए एक यूजर के लिए 200 रुपये तक कैशबैक और न्यूनतम ब्रॉडबैंड स्पीड 2 megabit प्रति सेकंड तय करना शामिल है।

 नियामक ने योजना में केबल टीवी ऑपरेटरों को लाने के लिए पहले से एडजस्ट ग्रॉस रेवेन्यू को अपनाने की भी सिफारिश की। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ग्रामीण क्षेत्रों में फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं के विकास में तेजी लाने के लिए डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांस्फर को लागू करने की सिफारिश की है, जिसके लिए प्रति ग्राहक उनके ब्रॉडबैंड कनेक्शन शुल्क के लिए प्रति माह 200 रुपये तक की रिईमबर्समेंट की जाती है।

 पायलट डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सुझाव

भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए मंगलवार को जारी की गई 298 पेज की सिफारिशों की लिस्ट में, TRAI ने ग्रामीण यूजर्स के बीच इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक पायलट डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) कार्यक्रम का भी सुझाव दिया। नियामक ने एक बयान में कहा, "ब्रॉडबैंड की परिभाषा की समीक्षा की गई है और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए मिनिमम डाउनलोड स्पीड को मौजूदा 512 KBPS से बढ़ाकर 2 MBPS कर दिया गया है। डाउनलोड स्पीड के आधार पर फिक्स्ड ब्रॉडबैंड को बेसिक, फास्ट और सुपर-फास्ट में कैटिगराइज्ड किया गया है।"

'बेसिक ब्रॉडबैंड' एक ऐसा कनेक्शन है जो एक इंडिविजुअल सब्सक्राइबर को 2 Mbps के बराबर या उससे ज्यादा और 50 mbps से कम डाउनलोड स्पीड प्रदान कर सकता है; 'फास्ट ब्रॉडबैंड' वह है जो 50 mbps के बराबर या उससे ज्यादा और 300 mbps से कम डाउनलोड स्पीड प्रदान करता है, जबकि 'सुपर-फास्ट ब्रॉडबैंड' वह है जो 300 mbps के बराबर या उससे ज्यादा डाउनलोड स्पीड प्रदान कर सकता है।

सस्ती हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का सुझाव

इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत अन्य देशों से काफी पीछे है। ट्राई के अनुसार, हाई फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड स्पीड सिंगापुर की 205 mbps है। ट्राई के सचिव वी रघुनंदन ने कहा, "भारत के लोगों के डिजिटल एम्पावरमेंट और बेहतर कल्याण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विश्वसनीय और सस्ती हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बहुत जरूरी है।" यह देश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल करने का एक प्रयास था। सिफारिशें दूरसंचार विभाग (DoT) को भेजी जा रही हैं, जो इस पर फैसला लेगी।

दूसरे देशों के मुकाबले भारत ब्रॉडबैंड की पहुंच है काफी कम

ट्राई ने बताया कि भारत में वर्तमान ब्रॉडबैंड की पहुंच लगभग 55% है, जो चीन की तुलना में 95% और यूरोपीय देशों की तुलना में लगभग 95-1155% 6 की तुलना में काफी कम है। भारत में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच दुनिया में सबसे कम प्रति सौ निवासी केवल 1.69 है, जबकि फ्रांस में 44.6, कोरिया में 42.8 और जर्मनी में 42.7 की तुलना में। पिछले 4-5 सालों में मोबाइल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की तीव्र वृद्धि के बावजूद, भारत की वैश्विक रैंकिंग उत्साहजनक नहीं है। भारत में प्रति 100 निवासियों पर मोबाइल ब्रॉडबैंड की पहुंच जापान में 182.4 और अमेरिका में 151.6 के मुकाबले 53.45 है।

फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं को बढ़ाने का सुझाव

TRAI ने कहा कि देश में फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं के विकास में तेजी लाने के लिए, लाइसेंसधारियों को प्रोत्साहन के लिए पात्र होना चाहिए। “शुरुआत में, पात्र लाइसेंसधारियों को प्रस्तावित प्रोत्साहन, यानी लाइसेंस शुल्क में छूट, कम से कम पांच साल की अवधि के लिए दी जानी चाहिए। 

इसके अतिरिक्त, यह सुनिश्चित करने के लिए कि फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं का विकास पूरे देश में हो, लाइसेंसधारियों को छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहक वृद्धि के टारगेट को पूरा करने की भी आवश्यकता है।

TRAI ने सुझाव दिया कि फिक्स्ड लाइन ब्रॉडबैंड सेवाओं के विकास में तेजी लाने में पायलट DBT परियोजना की व्यावहारिकता का पता लगाने के बाद, योजना की बारीकियों जैसे लाभार्थियों के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, रिइंबर्समेंट अमाउंट, स्कीम की अवधि आदि पर काम किया जाना चाहिए।

Edited By: Mohini Kedia

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