क्वांटम कंप्यूटर की दुनिया में बड़ी खोज, एक ‘फ्लिप’ से बचाया जा सकेगा जरूरी डेटा
क्वांटम कंप्यूटिंग में वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक खोजी है, जिससे भविष्य में क्वांटम कंप्यूटर के नाजुक डेटा को सुरक्षित ...और पढ़ें

क्वांटम कंप्यूटर की दुनिया में बड़ी खोज, एक ‘फ्लिप’ से बचाया जा सकेगा जरूरी डेटा

समय कम है?
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टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। क्वांटम कंप्यूटिंग वर्ल्ड में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी खोज ली है, जो फ्यूचर में क्वांटम कंप्यूटर में यूज होने वाली नाजुक क्वांटम डिटेल्स को सेफ रखने में मदद कर सकती है। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी RRI के वैज्ञानिकों ने पाया है कि किसी फोटॉन की क्वांटम स्टेज को सही टाइम पर सिर्फ एक बार ‘फ्लिप’ करने से दो फोटॉनों के बीच मौजूद क्वांटम एंटैंगलमेंट को एकदम से खत्म होने से रोका या इसकी ड्यूरेशन को बढ़ाया जा सकता है।
ये रिसर्च RRI की क्वांटम इनफार्मेशन एंड कंप्यूटिंग (QuIC) Lab ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी और लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चरस के साथ मिलकर की है। स्टडी को फिजिकल Review A में पब्लिश किया गया है और इसे डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के National Quantum Mission से फंडिंग मिली है।
पहले समझिए क्या है क्वांटम एंटैंगलमेंट?
दरअसल क्वांटम कंप्यूटर नॉर्मल कंप्यूटर से अलग तरीके से डेटा को प्रोसेस करते हैं। इनकी पावर क्वांटम स्टेज और खासतौर पर एंटैंगलमेंट जैसी चीजों पर डिपेंड करती है। एंटैंगलमेंट में दो कणों के गुण आपस में इस तरह कनेक्ट होते हैं कि उनके बीच दूरी होने के बाद भी उनमें मजबूत क्वांटम कनेक्शन बना रहता है।

मान लीजिए दो लोग एक-दूसरे से फोन पर जुड़े हुए हैं, लेकिन नेटवर्क बहुत खराब है और कुछ समय बाद कॉल कटने वाली है। वैज्ञानिकों ने पाया कि सही टाइम पर एक छोटा-सा हस्तक्षेप किया जाए तो कनेक्शन को टूटने से कुछ टाइम के लिए बचाया जा सकता है। बस यहां फोन कॉल की जगह दो फोटॉनों का क्वांटम कनेक्शन है।
ये क्वांटम स्टेज एनवायरनमेंट में काफी सेंसिटिव होते हैं। एनवायरनमेंट के साथ कॉन्टैक्ट होने पर क्वांटम गुण वीक पड़ जाते हैं और एंटैंगलमेंट खत्म हो सकता है। कुछ कंडीशंस में ये एंटैंगलमेंट एक टाइम पर पूरी तरह खत्म हो जाता है, जिसे ‘Entanglement Sudden Death’ कहा जाता है।
एक फ्लिप बदल सकता है रिजल्ट
RRI के साइंटिस्ट्स ने इस प्रोसेस को समझने के लिए लाइट पार्टिकल्स यानी फोटॉनों की जोड़ी का यूज किया है। फोटॉनों की अवस्थाओं को उनके पोलराइजेशन के बेस पर तय किया गया है। टेस्टिंग में एक वेवप्लेट की मदद से फोटॉन की स्टेज को एक बार फ्लिप किया गया।
रिसर्च में सामने आया कि फ्लिप का टाइम बेहद खास है। गलत समय पर किया गया फ्लिप एंटैंगलमेंट के खत्म होने को और तेज भी कर सकता है, जबकि सही टाइम पर किया गया फ्लिप इसे कुछ समय के लिए टाल सकता है।
