नई दिल्ली (टेक डेस्क)। रिलायंस जियो इन्फोकॉम और सैमसंग इंलेक्ट्रॉनिक्स ने कहा है कि वे दोनों मिलकर अखिल भारतीय स्तर पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) नेटवर्क स्थापित करेंगे। रिलायंस जियो के प्रेसीडेंट ज्योतिंद्र ठाकर ने कहा कि हम अपने उपभोक्ताओं को इनोवेटिव सेवाएं देने के लिए सैमसंग से हाथ मिला रहे हैं। रिलायंस जियो डिजिटल इंडिया की राह में बढ़ रही है। इस दिशा में IoT देश के हर कोने में पहुंचेगी।

समानांतर नेटवर्क पर न हो धन की बर्बादी:

एसएम एसोसिएशन के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा कि- ''अपना खुद का नेटवर्क संभालने वाली टेलीकॉम नेटवर्क कंपनियां (नेटकंपनी) ऐसी कंपनियों को जोड़ने में अहम साबित हो सकती हैं जो खुद का नेटवर्क नहीं रखती हैं। लेकिन अपने नेटवर्क को प्रतिस्पर्धा के लिए अहम मानने से इस सहयोग में बाधाएं आ रही हैं।''

मित्तल ने यहां मोबाइल वल्र्ड कांग्रेस 2018 को संबोधित करते हुए कहा कि- ''अरब डॉलर निवेश करके छोटे आकार के नेटवर्क बनाने से धन की बर्बादी होगी। भारत में दर्जन भर टेलीकॉम कंपनियां होने का प्रयोग गलत साबित हुआ है।''

क्या है इंटरनेट ऑफ थिंग्स?

इंटरनेट ऑफ थिंग्स नेटवर्किंग को कहा जाता है। अब आपके मन में सवाल होगा की यह किस तरह की नेटवर्किंग है? इस नेटवर्किंग में आपके उपयोग के सभी गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज एक-दूसरे से कनेक्ट होते हैं। यह टेक्नोलॉजी बेहद उपयोगी और कामगर है। टेक्नोलॉजी ने हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी को कितना आसान बना दिया है यह तो सभी जानते हैं। यह टेक्नोलॉजी भी वही करती है। इसे आसान भाषा में एक उदहारण के जरिए समझाया जा सकता है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स के अंतर्गत आपका एक डिवाइज आपके घर, किचन आदि में मौजूद अन्य डिवाइसेज को कमांड देता है। इस तरह से एक डिवाइस को इंटरनेट के साथ लिंक कर के बाकी डिवाइसेज से अपने अनुसार कुछ भी कार्य करवाया जा सकता है। जैसे की- एक कार बीमा कंपनी अपने पालिसी धारकों को सेंसर के माध्यम से किसी ऐसे क्षेत्र में बढ़ने से रोक/चेतावनी दे सकती है, जहां चक्रवात या कोई और आपदा आने की आशंका हो।

IoT की भारत में क्या स्थिति है?

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2014 में इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर मसौदा नीति जारी की थी। डिजिटल इण्डिया स्मार्ट सिटी पहल के साथ तालमेल की परिकल्पना के साथ अप्रैल 2015 में कुछ संशोधनों के साथ इसे जारी किया गया।

इस नीति के तहत 2020 तक 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंटरनेट ऑफ थिंग्स उद्योग बनाने की परिकल्पना है। इसके अलावा सरकार की तैयारी आईओटी सेंटर्स को भी डेवलप करने की है। 2020 तक आंध्रप्रदेश को मुख्य आईटी हब में परिवर्तित करने के उद्देश्य से आंध्रप्रदेश की सरकार ने भारत की पहली इंटरनेट ऑफ थिंग्स नीति 2016 को मंजूरी प्रदान की।

यहां तक कि निजी क्षेत्र में अगस्त 2015 में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड ने संयुक्त राज्य अमेरिका आधारित जैस्पर टेक्नोलॉजीज के साथ एक समझौता कर भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेवाओं में प्रवेश करने की कोशिश की।

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Posted By: Sakshi Pandya

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