यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
अब महिला वकीलों के ग्रुप ने की पोर्न पर बैन की मांग
न केवल चाइल्ड पोर्न बल्कि सभी पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध की मांग व फाइल शेयरिंग समेत पोर्न का उपयोग कर ...और पढ़ें

नई दिल्ली। न केवल चाइल्ड पोर्न बल्कि सभी पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध की मांग व फाइल शेयरिंग समेत पोर्न का उपयोग कर रही सारी गतिविधियां को रोकने की याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट की महिला वकीलों के संघ ने अब एपेक्स कोर्ट की ओर रुख किया है।
भारत सरकार के सभी पोर्न वेबसाइट्स को बैन करने के निर्णय पर लिए गए यू-टर्न के करीब एक माह बाद यह नया कदम लिया जा रहा है।
SCWLA की सचिव प्रेरणा कुमारी ने एपेक्स कोर्ट में मध्यस्थता के लिए आवेदन किया है। यह आवेदन 13 अक्टूबर को चीफ जस्टिस HL दत्तू के पास पेश होगा।
विकीपीडिया के आलेख और भारतीय मीडिया संस्थानों की खबरों को देखते हुए, आवेदन में समाज पर पोर्नोग्राफी के नकारात्मक भूमिका पर जोर दिया गया है साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि यह किस तरह युवा पीढी की मानसिकता को दूषित कर रहा है और महिलाओं के खिलाफ क्राइम करने को उकसाता है।
इसमें आगे कहा गया है कि CDs और पोर्न वीडियोज व इंटरनेट के जरिए कितनी आसानी से पोर्न को एक्सेस किया जा रहा है।
इन सब बातों को देखते हुए नेशनल पॉलिसी को संशोधित करने की जरूरत है।
