नई दिल्ली, टेक डेस्क। पिछले दिनों देश की सभी टेलिकॉम कंपनियों ने यूजर्स को चौंकाते हुए कहा कि 1 दिसंबर से मोबाइल सर्विस की दरें बढ़ने वाली है। ज्यादातर टेलिकॉम एक्सपर्ट की राय मानें तो पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के AGR पर आए फैसले के बाद टेलिकॉम कंपनियों (Reliance Jio, Airtel, Vodafone-Idea, BSNL) को ये कदम उठाना पड़ा है। इस समय देश की टेलिकॉम कंपनियों पर करीब Rs 92,000 करोड़ का कर्ज है, जिसे टेलिकॉम कंपनियों को अगले दो साल में सरकार को भुगतान करना है। आप ये सोच रहे होंगे कि इतने सारे कर्जे होने के बाद भी टेलिकॉम कंपनियां यूजर्स को फ्री डाटा और कॉलिंग कैसे ऑफर कर रही हैं।

आपको बता दें भारत में यूजर्स को सबसे कम दर पर डाटा सर्विस मुहैया कराई जा रही है। यूरोपीय और अमेरिकी देशों के मुकाबले ये दर कई गुना तक कम है। यूरोपीय देशों में 1GB डाटा के लिए यूजर से $6.66 (लगभग Rs 466) खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, अमेरिका में 1GB डाटा $12.37 (लगभग Rs 866) में उपलब्ध है। अगर, ग्लोबल एवरेज निकाला जाए तो ये यूजर्स को 1GB डाटा के लिए $8.53 (लगभग Rs 600) खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, भारतीय यूजर्स को 1GB डाटा के लिए महज $0.26 (लगभग Rs 18) खर्च करने पड़ते हैं जो कि अन्य देशों के मुकाबले कई गुना कम है। ज्यादातर भारतीय यूजर्स को 1GB डाटा के लिए महज Rs 7 खर्च करने पड़ते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत में अन्य देशों के मुकाबले डाटा की दरें इतनी कम क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण 2016 में आई कंपनी Reliance Jio है। पहले जहां यूजर्स को 1GB डाटा के लिए Rs 248 खर्च करना पड़ता था, जो Jio के आने के बाद से कई गुना कम हो गई है। TRAI की रिपोर्ट की मानें तो Reliance Jio ने ट्रायल पीरियड के दौरान ही 100 मिलियन यानि की 10 लाख यूजर्स जोड़े थे। इसकी सबसे बड़ी वजह फ्री डाटा सर्विस है। Reliance Jio ने यूजर्स को फ्री डाटा और कॉलिंग की ऐसी लत लगाई कि अन्य टेलिकॉम कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए अपनी डाटा और कॉल की दरें कम करनी पड़ी।

भारत में टेलिकॉम कंपनियों के बीच छिड़े प्राइस वॉर के बीच यूजर्स को तो फायदा हो रहा है, लेकिन टेलिकॉम कंपनियों को लगातार घाटा हो रहा है। कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर नहीं कर पा रही हैं, जिसकी वजह से यूजर्स को स्लो इंटरनेट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्लो इंटरनेट के अलवा पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ी समस्या जो उभर कर सामने आई है, उसमें कॉल ड्रॉप की समस्या प्रमुख है। टेलिकॉम कंपनियां मोबाइल टॉवर और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए ही अपनी कॉल दरें और डाटा की कीमतें बढ़ाने जा रही हैं।  

Posted By: Harshit Harsh

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