नई दिल्ली (टेक डेस्क)। डाटा लीक जैसे खतरों से बचने के लिए आजकल यूजर्स प्राइवेट ब्राउसिंग का इस्तेमाल करते हैं। अगर, आप अपने पर्सनल कंम्प्यूटर के अलावा ऑफिस, साइबर कैफे या फिर पब्लिक लाइब्रेरी में इंटरनेट का इस्तेमाल अपने ई-मेल या सोशल मीडिया अकाउंट को चेक करने के लिए करते हैं तो आपको प्राइवेट ब्राउसिंग इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। ऐसा इसलिए कि प्राइवेट ब्राउसिंग की वजह है उसी नेटवर्क से लिंक किसी दूसरे कम्प्यूटर के जरिए आपका पर्सनल डाटा लीक नहीं किया जा सकता है। Google Chrome ब्राउसर में दिया गया Incognito मोड प्राइवेट ब्राउसिंग के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है।

क्या वाकई में प्राइवेट ब्राउसिंग है सुरक्षित?

ज्यादातर एक्सपर्ट का मानना है कि आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए प्राइवेट ब्राउसिंग करना अच्छी बात है। इससे एक ही नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे दूसरे यूजर्स आपके पर्सनल अकाउंट पर नजर नहीं रख सकेंगे। लेकिन ज्यादातर डाटा लीक का खतरा बाहरी नेटवर्क से होता है। लोकल नेटवर्क के लिए प्राइवेट ब्राउसिंग इस्तेमाल करने पर आपका डाटा लीक नहीं होता है।

मेलवेयर अटैक रोकने में बेअसर

शिकागो यूनिरवर्सिटी द्वारा किए एक सर्वे कराया गया। इस सर्वे में भाग ले रहे 25 फीसद लोगों का मानना है कि प्राइवेट ब्राउसिंग से बेब के जरिए होने मेलवेयर अटैक से प्राइवेट ब्राउंसिंग लाभदायक है। ज्यादातर मेलवेयर आपके कम्प्यूटर में प्रवेश करने के बाद नुकसान पहुंचाते हैं। चाहे आप प्राइवेट ब्राउसिंग करके किसी फिशिंग ई-मेल को डाउनलोड करें या बिना प्राइवेट ब्राउसिंग के ये मेलवेयर आपके कम्प्युटर में प्रवेश कर लेते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं। मेलवेयर के प्रोटेक्शन के लिए एक सही एंटी-वायरस ही एकमात्र विकल्प है।

ब्राउसर एक्सेंटेशन हो सकता है खतरनाक

कई बार आप अपने ब्राउसर में एक्सटेंशन डाउनलोड करते हैं। इन एक्सटेंशन्स में से कुछ आपके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। ये ब्राउसर एक्सटेंशन आपके ब्राउसर के जरिए डाटा को चुराते हैं। माइक्रोसॉफ्ट एज में ये एक्सटेंशन पूरी तरह से डिसेबल्ड होते हैं जबकि मोजिला फायरफॉक्स में ये इनेबल्ड होते हैं। वहीं, गूगल क्रोम और ओपेरा इन एक्सटेंशन को डिसेबल्ड रखते हैं जब आप प्राइवेट ब्राउसिंग करते हैं।

VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) है ज्यादा सुरक्षित

सरकारी एजेंसी और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स प्राइवेट ब्राउसिंग के बावजूद भी आप पर नजर रख सकते हैं। ऐसे में अगर आप VPN (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का इस्तेमाल करते हैं तो इनके पास आपकी इनक्रिप्डेट जानकारी पहुंचती है और आपका डाटा सुरक्षित रहता है। VPN के इस्तेमाल से ये आपके ब्राउसर में डाले गए वेब अड्रेस के अलावा अन्य जानकारियों का भी पता नहीं लगा पाते हैं।  

Posted By: Harshit Harsh

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