100 में से 80 लोग नहीं जानते कैसे हुई थी इमोजी की शुरुआत, आज करोड़ों लोग करते हैं इस्तेमाल
आजकल WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया पर भावनाओं को व्यक्त करने के लिए इमोजी का उपयोग होता है। इन इमोजी ...और पढ़ें

100 में से 80 लोग नहीं जानते कैसे हुई थी इमोजी की शुरुआत, आज करोड़ों लोग करते हैं इस्तेमाल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आज आपको WhatsApp, Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी फीलिंग्स शेयर करने के लिए अलग अलग इमोजी देखने को मिल जाएंगे। खुशी हो, दुख हो, गुस्सा हो या कोई मजाक, एक छोटा-सा इमोजी कई बार आपकी पूरी बात कह सकता है, लेकिन क्या आपको मालूम है कि डिजिटल वर्ल्ड में फीलिंग्स बताने वाले इन इमोजी की शुरुआत आखिर कैसे हुई थी? चलिए आज इसी के बारे में जानते हैं...
पहले कीबोर्ड कैरेक्टर होते थे इस्तेमाल
इमोजी के आने से काफी टाइम पहले लोग ऑनलाइन चैट्स में नॉर्मल कीबोर्ड कैरेक्टर से ही अपनी फीलिंग्स शेयर करते थे। इस शुरुआत के पीछे अमेरिकन कंप्यूटर साइंटिस्ट स्कॉट फालमैन का नाम खास तौर पर जुड़ा हुआ है। 19 सितंबर 1982 को उन्होंने ऑनलाइन मैसेज बोर्ड पर :-) और :-( जैसे संकेतों का यूज करने का सजेशन दिया था।
सीरियस बात के बीच फर्क समझना मुश्किल
उस टाइम ऑनलाइन चैट्स आज की तरह आसान और इमोशनल नहीं होती थी। टेक्स्ट मैसेज में सामने वाले शख्स का चेहरा, आवाज या हाव-भाव दिखाई नहीं देते थे। ऐसे में मजाक और सीरियस बात के बीच फर्क समझना कई बार काफी मुश्किल भरा काम हो जाता था। लोग मजाक में कही गई बात को भी कोई सीरियस बात समझ लेते थे।
इसी समस्या को दूर करने के लिए :-) को खुशी या मजाकिया बात के संकेत के तौर पर यूज किया जाने लगा और :-( का यूज उदासी या सीरियस बात बताने के लिए किया जाने लगा। जब इन्हें सिर को थोड़ा झुकाकर देखा जाता है, तो आंखें, नाक और मुंह का शेप चेहरे जैसा दिखाई देता है।
टेक्नोलॉजी ने दिखाया बड़ा बदलाव
धीरे-धीरे ये संकेत ऑनलाइन बातचीत का हिस्सा बन गए। इसके बाद इसी तरह के टेक्स्ट संकेत को Emoticons कहा जाने लगा। इंटरनेट और मोबाइल मोबाइल के बढ़ते यूज के साथ इनका चलन भी तेजी से बढ़ने लगा। इसके बाद टेक्नोलॉजी ने एक और बड़ा बदलाव दिखाया। नॉर्मल टेक्स्ट कैरेक्टर की जगह फिर कलरफूल और अलग-अलग इमोशन वाले ग्राफिकल इमोजी आने लगे।
