नई दिल्ली(टेक डेस्क)। स्मार्टफोन ब्रैंड एप्पल ने एक एप कंपनी द्वारा किए गए दावों को सच माना है, जिनमें कंपनी द्वारा पुराने आईफोन की परफॉरमेंस धीमी करने की बात कही गई है। आईफोन के प्रोसेसर की स्पीड को चेक करने वाली एप निर्माता कंपनी प्राइमेट लैब्स ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार एप्पल आईफोन 6s और आईफोन 7 की परफॉरमेंस पुराने मॉडल होने के कारण कम या धीरे हो रही थी।

एप्पल ने माना रिपोर्ट का डाटा
एप्पल ने रिपोर्ट में दिए गए डाटा को सच बताते हुए माना की पावर की मांग को कम करने के लिए कंपनी ऐसा कदम उठती है। इसका सीधा असर फोन के प्रोसेसर की स्पीड पर पड़ता है। इसके कारण फोन स्लो हो जाता है। ऐसा तब होता है जब प्रोसेसर फोन की बैटरी से ज्यादा पावर की मांग करता है।

कंपनी ने बताया कारण
एप्पल द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार यह समस्या सिर्फ एप्पल के प्रोडक्ट्स तक ही सीमित नहीं है। यह समस्या लिथियम इयॉन बैटरी के साथ आती है। बैटरी पुरानी होने पर 100 फीसद पावर सप्लाई करने में सक्षम नहीं रहती। इसी के साथ अगर बैटरी पूरी तरह से चार्ज ना हो या ठंडी हो तब भी पूरी पावर सप्लाई नहीं दे पाती।

एप्पल ने इस बाबत आगे कहा की- '' हमने पिछले साल आईफोन 6, 6s और SE के लिए एक फीचर जारी किया था। यह इसलिए ताकि प्रोसेसर की ज्यादा पावर की मांग को कंट्रोल किया जा सके। इस तरह फोन के अचानक बंद हो जाने का खतरा टल जाता है।" इस फीचर को iOs 11.2 के साथ आईफोन 7 का हिस्सा बना दिया गया है। कंपनी भविष्य में अपने और भी प्रोडक्ट में इस फीचर को लेकर आएगी।

आपको बता दें, 2016 में आईफोन के अचानक बंद हो जाने की सबसे ज्यादा शिकायतें की गई थी। इसके बाद एप्पल ने सॉफ्टवेयर फिक्स जारी करने का फैसला लिया। इस कारण फोन की परफॉरमेंस थोड़ी धीमी हो जाती है।
 

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Posted By: Sakshi Pandya

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