UPI Payment करते समय न करें ये गलतियां, वरना चंद मिनट में खाली हो सकता है अकाउंट
यूपीआई भुगतान करते समय धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्कता और सही जानकारी आवश्यक है। आरबीआई और एनपीसीआई ने 'माई ...और पढ़ें

UPI Payment करते समय न करें ये गलतियां, वरना चंद मिनट में खाली हो सकता है अकाउंट

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। बीते एक दशक में एक ऐसी पीढ़ी तैयार हो गई है, जो स्मार्टफोन को जरिये ही अपनी सारी बैंकिंग जरूरतें पूरी कर लेती है। पैसे ट्रांसफर करने, बिल जमा करने, भुगतान और आनलाइन शापिंग में जो सहजता आज हो रही है, उसकी कुछ वर्ष पहले तक किसी ने कल्पना नहीं की थी। इन सुविधाओं की नींव में है- UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) की सुविधा।
इससे रोजमर्रा की लेनदेन तेज और आसान तो हुई हैं, पर कुछ खतरे भी बढ़े हैं। फिशिंग मैसेज, फर्जी कस्टमर केयर काल, खतरनाक लिंक, सोशल-इंजीनियरिंग स्कैम और धोखाधड़ी वाले पेमेंट रिक्वेस्ट कुछ ही मिनटों में बड़ी आर्थिक चोट पहुंचा सकते हैं। हालांकि, UPI आने के बाद से इसमें सुधार और सुरक्षा के बेहतर उपाय भी होते रहे हैं।
हाल ही में RBI और एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आफ इंडिया) ने नए UPI टैप-एंड-पे फीचर की शुरुआत की है। इसमें एनएफसी एनेबल्ड फोन के जरिये प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) पर बिना UPI एप खोले भुगतान किया जा सकता है। इसी तरह 'माय UPI' में एआइ एनेबल्ड सेफ्टी फीचर्स होने से पेमेंट प्रोसेसिंग को पहले से अधिक सुरक्षित बनाया गया है।
15 अक्टूबर से लागू हो रहे एमडीआर नियमों के पीछे भी एक बड़ा कारण UPI सिस्टम में संरचनागत सुधार है। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दायरे को देखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर लागत, इनोवेशन और सिक्योरिटी को बेहतर बनाने के लिए ऐसे उपाय आवश्यक भी हैं।
सुरक्षा में सुधार क्यों जरूरी
UPI के जरिये 55 करोड़ से अधिक यूजर, हर महीने 24 अरब से अधिक लेनदेन करते हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के डाटा से पता चलता है कि धोखाधड़ी के मामले 2021 में 2.6 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 28 लाख हो गए हैं, जिनकी सालाना वैल्यू ₹22,000 करोड़ से अधिक है। यही कारण है कि डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
RBI के एक डिस्कशन पेपर 'डिजिटल पेमेंट में धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की पड़ताल' में कई सुझाव दिए गए हैं, जैसे अधिक वैल्यू वाले ट्रांसफर के लिए एक घंटे की देरी, सीनियर सिटिजन जैसे यूजर्स के लिए ₹50,000 से अधिक की लेनदेन पर किसी 'भरोसेमंद व्यक्ति' द्वारा अतिरिक्त आथेंटिकेशन आदि।
आनलाइन फ्रॉड का तरीका हर रोज बदल रहा है। आजकल धोखाधड़ी 'आथराइज्ड पुश पेमेंट' (एपीपी) से होती है। यूजर्स को बहला-फुसलाकर या धोखा देकर पैसे भेजने के लिए मजबूर किया जाता है। UPI जैसे रियल-टाइम सिस्टम में, एक बार पैसे भेज दिए जाने के बाद उन्हें वापस पाना मुश्किल हो जाता है, इसलिए डिजिटल-पेमेंट इकोसिस्टम के लिए चुनौती कहीं अधिक है।
स्पीड-सिक्योरिटी की दुविधा
पेमेंट करने, पैसे ट्रांसफर करने और आनलाइन शापिंग में हर कोई चाहता है कि ट्रांजैक्शन कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाए। जबकि, मजबूत आथेंटिकेशन, फ्रॉड स्क्रीनिंग और रिस्क असेसमेंट में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है। इसका जवाब जरूरी नहीं कि हर पेमेंट को धीमा कर दिया जाए। इसके बजाय पेमेंट प्लेटफॉर्म को कम रिस्क वाले ट्रांजैक्शन और संदिग्ध एक्टिविटी के बीच फर्क करने की जरूरत है।
किसी जाने-पहचाने डिवाइस से ट्रांजैक्शन सामान्य होना चाहिए, जबकि कोई किसी नए व्यक्ति को अधिक धन भेजने के दौरान वेरिफिकेशन आवश्यक है, जैसा कि पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम में होता रहा है।
टेक्नोलाजी की सुरक्षा परत
माडर्न पेमेंट सिक्योरिटी अब आसान पासवर्ड और एक बार के वेरिफिकेशन कोड तक सीमित नहीं है। पेमेंट प्लेटफॉर्म संदिग्ध व्यवहार की पहचान के लिए कुछ सिग्नल का प्रयोग करते हैं। डिवाइस की जानकारी, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री, लोकेशन पैटर्न, खर्च करने के तरीके और अकाउंट एक्टिविटी में बदलाव जैसी बातों पर वे गौर करने लगे हैं।
संभावित फ्रॉड होने पर आटोमेटेड सिस्टम एक्स्ट्रा वेरिफिकेशन के लिए ट्रांजैक्शन को फ्लैग कर सकते हैं या कुछ समय के लिए रोक सकते हैं। एआइ ट्रांजैक्शन को एनालाइज कर ऐसे पैटर्न की पहचान कर सकता है, जिसे मैन्युअली करना संभव नहीं है।
हमें समझना होगा कि सिर्फ टेक्नोलाजी फ्रॉड को खत्म नहीं कर सकती। लोगों को खुद भी ट्रांजैक्शन आथराइज करने से पहले सतर्क होना होगा। किसी फ्रॉड मैसेज में दावे में फंसना, किसी फर्जी व्यक्ति को बैंक कर्मचारी मान लेना आपके लिए ही मुसीबतें पैदा कर सकता है।
UPI की नई सुरक्षा व्यवस्था
UPI इकोसिस्टम में पेमेंट और कस्टमर सपोर्ट को आसान बनाने के लिए बीते दिनों ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में माय UPI और UPI टैप-एंड-पे लांच किए गए। माय UPI एनपीसीआई के छोटे लैंग्वेज माडल FiMI का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
यह यूजर्स को अलग-अलग बैंकों और UPI एप्स पर ट्रांजैक्शन की जानकारी और आटोपे मैंडेट एक ही जगह पर देखने की सुविधा देता है। इसमें पेमेंट की सुरक्षा और कस्टमर सपोर्ट पर केंद्रित अनेक फीचर हैं। इसका 'सेफ्टी स्विच' यूजर्स को UPI डेबिट ट्रांजैक्शन को अस्वीकार करने की सुविधा देता है, अगर उन्हें अपने अकाउंट में किसी सुरक्षा समस्या का संदेह हो।
इसमें UPI नंबर डीलिंक करने का विकल्प भी है। यह यूजर्स को UPI पेमेंट प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल नंबर को डीलिंक करने की सुविधा देता है।
पेमेंट करने से पहले, यूजर्स 'पेई कांटेक्स्ट-बेस्ड इन्फार्मेशन' फीचर के जरिये बेनिफिसरी के बारे में अतिरिक्त जानकारी देख सकते हैं। इसमें 'ट्रांजैक्शन रीप्ले' भी शामिल है, जो पिछले ट्रांजैक्शन को दोबारा करने की सुविधा देता है।
इसी तरह UPI टैप-एंड-पे एनएफसी के जरिये काम करता है। यह यूजर्स को एनएफसी-इनेबल्ड पाइंट-आफ-सेल (पीओएस) टर्मिनल पर पेमेंट करने की सुविधा देता है। यूजर को स्मार्टफन अनलाक करके एनएफसी-इनेबल्ड पीओएस पर टैप करना होगा।
ट्रांजैक्शन के लिए फोन में मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं है क्योंकि पीओएस मशीन अपने इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर सकती है। 5000 रुपये तक के पेमेंट बिना पिन के किए जा सकते हैं। इससे अधिक के लिए यूजर को पीओएस टर्मिनल पर अपना UPI पिन डालना होगा।
UPI पेमेंट को सुरक्षित बनाने के तरीके
- अपने अकाउंट से भुगतान के लिए ही UPI पिन डालें। पैसे पाने के लिए पिन की जरूरत नहीं होती।
- UPI आइडी वेरिफाइ करते समय पैसा प्राप्त करने वाले व्यक्ति का नाम जरूर जांचना चाहिए।
- पिन हमेशा एप के UPI पिन पेज पर ही दर्ज करना चाहिए। इसे किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
- क्यूआर कोड को सिर्फ पेमेंट करने के लिए स्कैन करना चाहिए, पैसे पाने के लिए नहीं।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर या बिना उसका काम समझे कोई भी स्क्रीन शेयरिंग या एसएमएस फॉरवर्ड ग एप डाउनलोड नहीं करना चाहिए।
क्या करें
- बैंक रिकार्ड में अपना मोबाइल नंबर अपडेट रखें।
- ट्रांजैक्शन करते समय UPI एप के इन-एप नोटिफिकेशन जरूर देखें।
- बैंक से संबंधित जानकारी सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट से ही लें।
- समस्या होने पर शिकायत हमेशा बैंक या पुलिस को ही करें।
क्या न करें
- बैंक कर्मचारी या अधिकारी बनकर कोई एसएमएस फॉरवर्ड या एप में लागइन के लिए कहे, तो ऐसा न करें।
- डेबिट कार्ड की जानकारी और UPI पिन के साथ साझा करने से बचें।
- रिमोट एक्सेस / स्क्रीन शेयरिंग करने से बचें।
- इंटरनेट मीडिया पर अपनी शिकायतों या ट्रांजैक्शन की जानकारी कभी पोस्ट न करें।
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