प्रवीण मालवीय। देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल का चलन बढ़ रहा है। इस बीच दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने के कई मामले भी सामने आए हैं। बीते दिनों हैदराबाद के एक ईवी शोरूम में आग लगने से ऊपरी माले में स्थित होटल में आठ लोगों की मौत हो गई। बढ़ते ईवी हादसों के बीच समाधान की कोशिशें भी जारी हैं। कुछ भारतीय कंपनियां बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) युक्त बैटरियों के विकास और उत्पादन पर काम कर रही हैं। दरअसल, किसी गड़बड़ी से पहले ही बीएमएस चेतावनी दे देता है। ईवी में आग लगने की वजह बैटरी, ईवी के ईंधन का स्रोत है। यही कारण है कि आग लगने की घटना बैटरी से ही होती है। अधिक तापमान में ओवरहीट होने, चार्जिंग के दौरान ओवरचार्ज होने या बैटरी सेल्स के लगातार अनियमित व्यवहार से बैटरी में धमाका होने और आग लगने जैसी दुर्घटनाएं होती हैं।

ऐसे काम करती है बीएमएस तकनीक

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम युक्त बैटरी तैयार करने वाली भारतीय कंपनी एम्पटेक के जुबिन कुमार बताते हैं, इस तकनीक में बैटरी के अंदर सेंसर लगाए जाते हैं। सेंसर बैटरी के प्रत्येक सेल का तापमान और उसकी सेहत को लगातार मापते रहते हैं। यदि किसी सेल का तापमान असामान्य रूप से बढ़ता है, तो सेंसर उसे पकड़ लेते हैं। बैटरी में समस्या होने पर ईवी की स्क्रीन और उससे अटैच मोबाइल की स्क्रीन पर चेतावनी आ जाती है। जुबिन बताते हैं कि लीथियम आयन की बैटरी एनएमसी और एलएफपी होती हैं। एनएमसी में निकिल, मैंगनीज और कोबाल्ट का सम्मिश्रण होता है, वहीं एलएफपी लीथियम आयन फास्फेट होता है।

तीसरे तार का खेल

आटोमोबाइल एक्सपर्ट और ईवी मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप इनिग्मा के फाउंडर अनमोल बोहरे बताते हैं, बीएमएस को सरल भाषा में समझाना हो और लोगों से इसकी पहचान करानी हो, तो बैटरी के तीसरे तार पर ध्यान दें। अब तक सभी बैटरियों में पाजिटिव इलेक्ट्रोड और नेगेटिव कैथोड होते हैं। लेकिन बीएमएस युक्त बैटरियों में तीसरा

तार भी होता है जो इसके सिस्टम या सेंसर्स से जुड़ा होता है यह बैटरी का पूरा डाटा भेजता है जिसे ईवी की स्क्रीन, मोबाइल पर देखा जा सकता है। अधिकतर दुर्घटनाएं तापमान बढ़ने और ओवर चार्जिंग से होती हैं, ऐसे में समय पर चेतावनी मिल जाए तो ईवी को बंद करने, चार्जिंग हटाने, बैटरी को अलग करने जैसे कदम उठाकर दुर्घटना की आशंका खत्म की जा सकती है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal