नई दिल्ली, टेक डेस्क। Facebook सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zukerberg) ने इंटरनेट पर चीनी रेग्यूलेशन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बाकी देशों से इंटरनेट को लेकर चीनी मॉडल न फॉलो करने की सलाह दी। साथ ही चीनी मॉडल को रिप्लेस करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वेस्ट के मुकाबले चीनी वैल्यू अलग हैं। जुकरबर्ग ने यूरोपियन यूनियन के ऑफिसर Thierry Breton के साथ हुए लाइव स्ट्रीमिंग में कहा कि मुझे लगता है कि चीन के मुकाबले में वेस्ट के देश ज्यादा लोकतांत्रिक हैं। इसकी एक झलक उनकी इंटरनेट को लेकर अपनाए जाने वाले रेग्यूलेशन में भी साफ झलकती है। जुकेरबर्ग ने वेस्ट इंटरनेट मॉडल को बेस्ट बताया।

जुकरबर्ग ने वैश्विक जगत के बाकी देशों से चीनी इंटरनेट मॉडल को नहीं पहनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अन्य देशों को चीन के इंटरनेट रेग्यूलेशन के रवैये की खिलाफत करनी चाहिए और इंटरनेट को लेकर लोकतांत्रिक रुख अख्तियार करें। जुकरबर्ग ने इतना तक कह दिया कि वेस्ट कंट्री दुनिया के लिए इंटरनेट रेग्यूलेशन का सेट पैमाना हो सकती हैं। इससे पहले भी जुकरबर्ग चीनी पॉलिसी की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में हुए HongKong प्रोटेस्ट के कंटेंट को Tiktok पर न दिखाए जाने को लेकर भी चीन की आलोचना की थी। जुकेरबर्ग ने कहा कि कंपनियों और सरकार के बीच सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर रिफॉर्म जरूरी हैं। इसकी के मद्देनजर Facebook ने दुनियाभर में डाटा प्राइवेसी को लेकर अपने रवैये में बदलाव किया है।

Facebook की इंटरनेट पॉलिसी को लेकर भी एक वक्त विवाद उठ चुका है। Facebook का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था Internet.org जिसका विरोध नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांत का उल्लंघन करने के लिए किया गया था। Facebook का कहना था कि Internet.org प्रोग्राम के तहत वह रिमोट इलाकों में बेसिक इंटरनेट सर्विसेज मुफ्त में पहुंचाना चाहता है। आलोचकों का मानना था कि Facebook की इस पहल से गरीब इलाकों में यह समझ बन जाएगी कि इंटरनेट का मतलब सिर्फ Facebook है और उसके बाद Facebook इस बात से मुनाफा कमाएगा।

(Written By: Saurabh Verma)

Posted By: Harshit Harsh

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