नई दिल्ली (टेक डेस्क)। फेसबुक ने यूजर की मर्जी के बिना उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें साझा करने वालों के खिलाफ अपनी जंग तेज कर दी है। कंपनी अपने उस पायलट प्रोग्राम को बढ़ावा दे रही है, जिसमें यूजर से उसकी एक तस्वीर अपलोड करने को कहा जाता है। फेसबुक इंटरनेट पर पहुंचने से पहले इस तस्वीर को फेसबुक डिलीट कर देता है। इससे तस्वीर के शेयर होने का खतरा खत्म हो जाता है।

फेसबुक की ओर से मंगलवार को किए पोस्ट में कंपनी के वैश्विक प्रमुख सुरक्षा एंटीगोन डेविस ने कहा कि कंपनी अपने पायलट प्रोग्राम को अपडेट कर रही है ताकि बिना सहमति के फेसबुक पर तस्वीरें साझा करने से रोका जा सके। इससे पहले फेसबुक पर आपत्तिजनक तस्वीरें साझा होने के बाद उनकी रिपोर्ट करनी पड़ती थी। इसके बाद फेसबुक इन तस्वीरों को हटाता था। इस पायलट सिस्टम का अमेरिका, कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया में ट्रायल हो चुका है। सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में पिछले साल के आखिरी महीनों में इस तकनीक का ट्रायल हुआ था।

यूजर की तस्वीर का बन जाएगा फिंगरप्रिंट

जिन यूजर को अपनी अंतरंग तस्वीरें फेसबुक, इंस्टाग्राम या मैसेंजर पर साझा होने का डर होगा, उन्हें स्थानीय संस्था से संपर्क कर एक फॉर्म भरना होगा। इसके बाद यूजर को तस्वीर साझा करने का वन टाइम यूज लिंक मिलेगा। इस तस्वीर को फेसबुक की सुरक्षा टीम देखेगी। फिर इस तस्वीर से एक यूनिक हैश तैयार किया जाता है। यह हैश तस्वीर के फिंगर प्रिंट की तरह काम करता है। इसके बाद अगर कोई भी उस यूजर की तस्वीर साझा करने की कोशिश करेगा, तो फेसबुक उसे पकड़ लेगा। और फेसबुक इस प्रक्रिया के लिए यूजर की तस्वीर भी अपने सर्वर में सेव नहीं करेगा।

कई संगठनों से मिलाया हाथ

यूजर आसानी से इन तस्वीरों की शिकायत कर सकें इसलिए फेसबुक ने अलग-अलग क्षेत्रों में कई संगठनों से समझौता किया है। जैसे, अमेरिका में साइबर सिविल राइट इनिशिएटिव और द नेशनल नेटवर्क टू एंड डोमेस्टिक वायलेंस, कनाडा में वाईडब्ल्यूसीए और ऑस्ट्रेलियन आॅफिस आॅफ द ई-सेफ्टी कमीशन से फेसबुक हाथ मिला चुका है। 

Posted By: Shilpa Srivastava

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