नई दिल्ली, पीटीआई। Social Media Platforms: सरकार इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के फैसलों के खिलाफ यूजर्स की शिकायतों पर विचार के लिए तीन शिकायत अपीलीय समितियों (जीएसी) के गठन पर विचार कर रही है। इसके अलावा ये कमेटी इस क्षेत्र से जुड़े कई और मुद्दों पर सलाह भी देंगी। इन कमेटी को स्थापित करने का सीधा मतलब कंटेंट को लेकर इन कंपनियों की मनमानी को रोकना और किसी भी फैसले को लेकर जवाबदेही तय करना है।

जनवरी से शुरू हो सकती हैं प्रक्रिया

सीधे शब्दों में कहें तो ये समितियां मेटा (Meta) और ट्विटर (Twitter) जैसी कंपनियों द्वारा कंटेंट को माडरेट करने के फैसलों की समीक्षा करेंगी। ये समितियां जरूरत पड़ने पर बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के फैसलों को पलट भी सकती हैं। सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इन समितियों के तौर-तरीकों पर परामर्श की प्रक्रिया जनवरी से शुरू होगी।

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सूत्रों ने बताया है कि इन समितियों को ऐसी अपीलें सौपी जाएंगी, जिन्हें हाल ही में संशोधित आइटी नियमों में उल्लिखित हानिकारक कंटेंट के तौर पर शामिल किया गया है। मोटे तौर पर इन समितियों को सौंपी जाने वाली अपीलें पोर्नोग्राफी, फेक न्यूज और धार्मिक उत्तेजना से संबंधित शिकायतें हो सकती हैं। सरकार ने नए नियमों में आपत्तिजनक धार्मिक सामग्री के साथ पोर्नोग्राफी, ट्रेडमार्क उल्लंघन, फेक न्यूज और ऐसी सामग्रियों को जोड़ा गया है जो राष्ट्र की संप्रभुता के लिए खतरा हो सकती है।

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