कुर्सी या बेड पर बैठकर पैर क्यों नहीं हिलाने चाहिए? जानिए बड़े-बुजुर्ग ऐसा करने से क्यों रोकते हैं
हिंदू धर्म में कुर्सी या बिस्तर पर बैठकर पैर हिलाने को अशुभ माना जाता है, जिसके पीछे ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के गहरे कारण हैं।
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कुर्सी या बेड पर बैठकर पैर हिलना सही या गलत? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
पैर हिलाना धन हानि और मानसिक तनाव का कारण बनता है।
यह आदत कुंडली में चंद्रमा और शनि को प्रभावित करती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अक्सर घरों में बड़े-बुजुर्ग कुर्सी या बिस्तर पर बैठकर पैर हिलाने पर तुरंत टोक देते हैं, जिसे कई लोग अंधविश्वास मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इससे पीछे ज्योतिष शास्त्र और वास्तु शास्त्र में बेहद खास रहस्य है।
ऐसा माना जाता है कि बेड या फिर कुर्सी पर बैठकर पैर हिलाने से इंसान को जीवन में धन हानि का सामना करना पड़ सकता है और अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही से कुंडली में चंद्रमा और शनि की स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर ऐसा करने से क्यों मना किया जाता है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार बताते हैं इसके पीछे की खास वजह के बारे में।
श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार, बैठते समय निरंतर पैर हिलाने से कुंडली में चंद्रमा और शनि की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

(Picture Credit: AI Generated)
ज्योतिषीय, वास्तु और मानसिक प्रभाव
मानसिक तनाव और चंचलता: बिस्तर या कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत से मन में चंचलता आती है और मानसिक तनाव बढ़ता है।
धन हानि का कारण: सनातन मान्यता के अनुसार, यह आदत घर से लक्ष्मी और समृद्धि के जाने का कारण बनती है। पौराणिक मान्यताओं में इसे अलक्ष्मी का आह्वान माना गया है, जिससे बेवजह के खर्चे बढ़ते हैं और धन संचय में बाधा आती है।
नकारात्मक ऊर्जा: वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से बिना किसी कारण पैर हिलाने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो व्यक्ति की एकाग्रता और कार्यक्षमता को कम करती है।
कार्यक्षमता और फोकस में कमी- यह नकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति के ध्यान को भंग करती है, जिससे एकाग्रता घटती है और बनते हुए कार्यों में अचानक रुकावटें आने लगती हैं।
ग्रहों का अशुभ प्रभाव: यह आदत कुंडली में चंद्रमा और शनि की स्थिति को कमजोर करती है। चंद्रमा मन का कारक है और शनि स्थिरता का, इसलिए इनके पीड़ित होने से जीवन में अस्थिरता, संघर्ष और मानसिक अशांति बढ़ती है।
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