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घर में एक से ज्यादा मंदिर रखना सही या गलत? क्या कहते हैं वास्तु के नियम

Published: Thu, 09 Jul 2026 06:00 PM (GMT+05:30)

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखी किसी भी चीज के लिए सही वास्तु नियम बनाए गए हैं और उनके ...और पढ़ें

घर में दो मंदिर: वास्तु के नियम क्या कहते हैं, जानें शुभ-अशुभ प्रभाव (Picture Credit:AI Generated)

घर में दो मंदिर: वास्तु के नियम क्या कहते हैं, जानें शुभ-अशुभ प्रभाव (Picture Credit:AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर घर में कोई न कोई पूजा का स्थान जरूर होता है और वहां बैठकर लोगों के मन को शांति मिलती है। दिनभर की थकान मिटाने और मानसिक तनाव दूर करने के लिए घर का मंदिर एक पवित्र स्थान माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि जिस घर में मंदिर वास्तु के नियमों के अनुरूप बना हो वहां किए लोगों की मानसिक शांति बनी रहती है और जीवन में समृद्धि आती है।

जिस तरह से मंदिर के लिए सही दिशा का होना जरूरी है उसी तरह से इसे स्थापित करने के कुछ नियम भी बनाए गए हैं और उनका पालन जरूरी माना जाता है जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। कई बार घर बड़ा होने पर लोग एक की जगह दो मंदिर रखते हैं और यही नहीं उनकी पूजा के नियम भी नहीं मानते हैं।

ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या एक ही घर में दो मंदिर रखना ठीक है? आइए जानें इसके बारे में क्या कहता है वास्तु शास्त्र।

घर में नहीं होने चाहिए दो मंदिर

वास्तु के अनुसार, घर में पूजा का स्थान या मंदिर इस तरह से रखा जाता है जहां घर के सभी सदस्य एक साथ खड़े होकर पूजा कर सकें। ये पारिवारिक एकता का केंद्र माना जाता है।

ऐसे में जब आप पूजा के दो अलग स्थान बना देते हैं तो घर के सदस्यों के बीच भी मतभेद होने लगते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है कि अलग-अलग मंदिरों में पूजा का तरीका भी अलग हो जाता है जिससे ऊर्जा का टकराव होने लगता है और इसी वजह से कलह-कलेश की स्थिति बनने लगती है। जब एक ही मंदिर घर में होता है तो वह आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल बन जाता है और भक्ति का केंद्र भी बना रहता है।

घर के मंदिर में जगह की कमी है तो क्या करें?

घर में प्रार्थना और ध्यान के लिए एक ही स्थान का होने वास्तु के अनुकूल माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के पूजा मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण सबसे अच्छी जगह मानी जाती है। अगर आप इस वजह से घर में दो मंदिरों की स्थापना कर रहे हैं क्योंकि एक ही मंदिर में पूजा की सभी सामग्रियां इकठ्ठा रख पाना मुश्किल हो रहा है, तो आप मंदिर के दो अलग स्थान बनाने के बहाय एक ही मंदिर के आस-पास शेल्फ बनाएं।

गलत तरीके से और वास्तु नियमों का पालन न करते हुए यदि आप घर में दो मंदिर स्थापित करते हैं तो इससे अशांति आ सकती है। ऊर्जा का टकराव हो सकता है और आपकी समृद्धि में भी बाधा आ सकती है।

किस स्थिति में दो मंदिर रख सकते हैं?

हालांकि यदि घर में दो हिस्से हैं और दो परिवार अलग हिस्सों में रहते हैं तब पूजा के मंदिर भी दो बनाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए एक ही बड़े घर में ऊपरी मंजिल में अलग परिवार के लोग रहते हैं और उनका पूजा करने का तरीका भी अलग है तो आप ऐसी स्थिति में दो मंदिर स्थापित कर सकते हैं।

अगर आपके घर में भी दो मंदिर हैं तो इस बात की जानकारी लेना उचित होगा कि आखिर क्यों ऐसा करना वास्तु के अनुकूल नहीं है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।