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सुखी दांपत्य जीवन का राज क्या है? करवा चौथ से जुड़ा ऋग्वेद का यह मंत्र देता है सीख

Published: Mon, 26 Oct 2026 12:54 PM (IST)

ऋग्वेद में पति-पत्नी के मन और भावनाओं को जोड़ने की जो कामना की गई है, उसी की पूर्ति में सहयोगी बनता है करवा चौथ का पर्व।

करवा चौथ का वैदिक संदेश: प्रेम और विश्वास से सुखी दांपत्य जीवन

करवा चौथ का वैदिक संदेश: प्रेम और विश्वास से सुखी दांपत्य जीवन

HighLights

  1. करवा चौथ प्रेम, विश्वास और आपसी समझ का प्रतीक

  2. सुखी दांपत्य जीवन के लिए वैदिक संदेश महत्वपूर्ण

  3. पति-पत्नी दोनों की जिम्मेदारी, त्याग और सम्मान आवश्यक

डॉ. चिन्मय पण्ड्या (उपाध्यक्ष, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार)। समंजन्तु विश्वे देवाः समापो हृदयानि नौ। सं मातरिश्वा सं धाता समु देष्ट्री दधातु नौ॥”

 

ऋग्वेद के इस सुंदर मंत्र का अर्थ है कि सभी देवशक्तियां हमारे हृदयों को एक करें। जैसे जल आपस में मिल जाता है, वैसे ही पति-पत्नी के मन और भावनाएं भी एक-दूसरे से जुड़ी रहें। यह वैदिक संदेश हमें सिखाता है कि सुखी दांपत्य जीवन का आधार केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और आपसी समझ है। इसी वैदिक भावना से जुड़ा है करवा चौथ का पर्व।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (करवा चौथ) को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं तथा रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं। करवा चौथ का महत्व केवल दिन भर उपवास रखने में नहीं, बल्कि अपने मन और व्यवहार को अच्छा बनाने में भी है। व्रत हमें संयम, धैर्य और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है। भारतीय परंपरा में चंद्रमा को शीतलता और शांति का प्रतीक माना गया है। चंद्रमा की तरह हमारे स्वभाव में भी शांति, वाणी में मिठास और व्यवहार में प्रेम होना चाहिए।

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने भी प्रेम और त्याग को जीवन का महत्वपूर्ण आधार माना है। उनके विचारों के अनुसार सच्चा प्रेम केवल अपनी इच्छाएं पूरी करने में नहीं, बल्कि दूसरों की प्रसन्नता और भलाई के लिए त्याग करने में है। पति-पत्नी का संबंध तभी मजबूत होता है, जब दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को समझें, सुख-दुख में साथ दें और आपसी सम्मान बनाए रखें। जहां स्वार्थ की जगह सहयोग और अहंकार की जगह अपनापन होता है, वहां परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

आज के समय में करवा चौथ के संदेश को व्यापक रूप में समझने की जरूरत है। परिवार को सुखी बनाने की जिम्मेदारी केवल पत्नी की नहीं, बल्कि पति की भी उतनी ही है। दोनों को एक-दूसरे के स्वास्थ्य, भावनाओं, सम्मान और सपनों का ध्यान रखना चाहिए। करवा चौथ केवल एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि जीवनभर प्रेम, विश्वास और समर्पण निभाने का संकल्प है। जब पति-पत्नी के बीच विश्वास की मजबूती, व्यवहार में मिठास, मन में अपनापन और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देने की भावना होती है, तभी परिवार सुखी और संस्कारवान बनता है।

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