ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम में अपने देश के अतिरिक्त चीन, ब्राजील, जापान, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, फ्रांस, तुर्की आदि देशों के अनेक लोग आए थे योग-जिज्ञासु बनकर, लेकिन जब अपने देश वापस गए तो वे गंगा और पर्यावरण की स्वच्छता के हिमायती बन चुके थे। यहां चल रहा योग विज्ञान शिविर अंतत: पर्यावरण संव‌र्द्धन और गंगा निर्मलीकरण शिविर में तब्दील हो गया।

लोगों ने योग के विभिन्न पहलुआें को तो सीखा ही, साथ ही गंगा की स्वच्छता, अपने परिवेश की स्वच्छता और पर्यावरण स्वच्छता के कई सूत्र भी सीखे।

पिछले दिनों आयोजित इंटरनेशनल ग्रीन विजन कॉन्फ्रेंस में अनेक पर्यावरण वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, गंगाप्रेमी, पर्यावरणप्रेमी आदि परमार्थ निकेतन आश्रम में एकत्रित हुए और उन्होंने इस दिशा में बहुत कुछ करने की इच्छा प्रकट की।

गंगा एक्शन परिवार ने विभिन्न अंचलों के एवं विविध क्षेत्रों के लोगों को सेवा के नए-नए अवसर दिए हैं। युवाओं को स्वरोजगार के गुर सिखाने की बात हो या गोवंश की सुरक्षा और उसके संव‌र्द्धन का वातावरण विकसित करने की, परमार्थ निकेतन के लोकसेवी प्रयासरत हैं। इन प्रयत्नों को मूर्त रूप देने के लिए यहां कई सेवा प्रभाग हैं, जैसे शिक्षा प्रभाग, स्वास्थ्य प्रभाग, स्वावलंबन प्रभाग, युवा जागरण प्रभाग, प्रतिभा खोज प्रभाग एवं मीडिया प्रभाग। सभी प्रभागों के स्वयंसेवी कार्यकर्ता अपने-अपने प्रयासों को फलीभूत करने के लिए परिश्रम कर रहे हैं।

इन प्रभागों का मार्गदर्शन कर रहे स्वामी चिदानंद सरस्वती कहते हैं, 'व्यावहारिक अध्यात्मवाद की नई परिभाषा गढ़ते इन कार्यकर्ताओं में अनेक युवा लोकसेवी हैं और ऐसे समर्पितों को जोड़कर उनके प्रतिभा नियोजन के सभी प्रयत्न गंगा एक्शन परिवार द्वारा किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य एक ही है- दुनिया को रहने लायक बनाना, नदियों का जल पीने लायक बनाना और युवा शक्ति का मार्गदर्शन करना।' स्वामी जी के अनुसार, भारत में परिवर्तन का दौर है, जिसमें सब कुछ बदलेगा।

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