यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 24, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
व्यक्ति आत्मविश्वासी हो पर अभिमानी कभी न हो
आत्मविश्वास से मनुष्य जागरूक होता है और उसमें जीवन मूल्यों और अपनी संस्कृति और समाज की रक्षा के प्रति पवित्र भावना का उदय होता है।

किसी कार्य को करने में हम किस स्तर तक सफल होंगे, इसका आभास हमें शुरुआत में ही हो जाता है। ऐसा हमारे आत्मविश्वास के कारण होता है। यदि कार्य शुरू करते वक्त हमारे भीतर से यह आवाज आती है कि हम इसे कर सकते हैं, तो निश्चित तौर पर उस कार्य को करने में हम काफी हद तक सफल रहते हैं। इसके विपरीत यदि हम शुरुआत में यह मानने लगे कि यह कार्य हमसे नहीं होगा, तो हो सकता है कि हम वह कार्य शुरू ही न कर सकें।
आत्मविश्वास मतलब अपने ऊपर विश्वास करना है। यानी यदि हमें अपने ऊपर यकीन है, तो कोई भी काम असंभव नहीं है। लेकिन जब हमें स्वयं पर विश्वास नहीं होता, तो सारे कार्य हमें असंभव लगते हैं। दरअसल जब हम आत्मविश्वास के साथ कोई कार्य करते हैं, तो उसमें मिली असफलता भी हमें दुख नहीं देती, क्योंकि कार्य को करने की खुशी उसी क्षण मिल जाती है और वही उसका इनाम है। स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि कभी अपने पर से विश्वास मत खोइए। आप इस संसार में कुछ भी कर सकते हैं। आत्मविश्वास से समाज और दुनिया की बड़ी से बड़ी समस्याएं बौनी हो जाती हैं। आत्मविश्वासी व्यक्ति हर समस्या व संघर्ष को चुनौती के रूप में लेता है और इन सारी समस्याओं के जंजाल को अभिनय से ज्यादा महत्व कभी नहीं देता।
आत्मविश्वास से मनुष्य जागरूक होता है और उसमें जीवन मूल्यों और अपनी संस्कृति और समाज की रक्षा के प्रति पवित्र भावना का उदय होता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास हमें दृढ़ता प्रदान करता है। किसी व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए हमें उसके द्वारा अर्जित छोटी-छोटी उपलब्धियों पर उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति कुछ नहीं कर पा रहा है, तो भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जब हम किसी को प्रोत्साहित करते हैं, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
इस वजह से व्यक्ति असंभव लगने वाले कार्य को भी संभव कर देता है। प्रशंसा एक उपहार है, जिसका परिणाम सदैव आनंदमय होता है। वैसे कई बार आत्मविश्वास इंसान के ऊपर हावी होकर अभिमान में परिवर्तित हो जाता है। आत्मविश्वास में व्यक्ति नित नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता है, जबकि अभिमानी व्यक्ति एक दायरे में सिमटकर रह जाता है। हर व्यक्ति को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह आत्मविश्वासी हो, पर अभिमानी कभी न हो।
