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झूठ अनेक हैं, मगर सत्य सिर्फ एक: ओशो

Publish Date:Wed, 23 Aug 2017 04:14 PM (IST) | Updated Date:Wed, 23 Aug 2017 04:14 PM (IST)
झूठ अनेक हैं, मगर सत्य सिर्फ एक: ओशोझूठ अनेक हैं, मगर सत्य सिर्फ एक: ओशो
इस दुन‍िया में झूठ और सत्‍य दोनों ही मौजूद हैं, लेक‍िन दोनों के शक्‍त‍ि और संख्‍या में बड़ा अंतर हैं। जान‍िए आध्यात्मिक गुरु ओशो रजनीश के मुताबि‍क सत्‍य और झूठ के संसार को...

सत्य से दोस्ती कठिन 

जीवन के हर आयाम में सत्य के सामने झुकना मुश्किल है और झूठ के सामने झुकना सरल। ऐसी उलटबांसी क्यों है? उलटबांसी जरा भी नहीं है; सिर्फ तुम्हारे विचार में जरा सी चूक हो गई है, इसलिए उलटबांसी दिखाई पड़ रही है। चूक बहुत छोटी है, शायद एकदम से दिखाई न पड़े, थोड़ी खुर्दबीन लेकर देखोगे तो दिखाई पड़ेगी। सत्य के सामने झुकना पड़ता है; झूठ के सामने झुकना ही नहीं पड़ता, झूठ तुम्हारे सामने झुकता है और इसीलिए झूठ से दोस्ती आसान है, क्योंकि झूठ तुम्हारे सामने झुकता है और सत्य से दोस्ती कठिन है, क्योंकि सत्य के सामने तुम्हें झुकना पड़ता है। अंधा अंधेरे से दोस्ती कर सकता है, क्योंकि अंधेरा आंखें चाहिए ऐसी मांग नहीं करता, लेकिन अंधा प्रकाश से दोस्ती नहीं कर सकता है, क्योंकि प्रकाश से दोस्ती के लिए पहले तो आंखें चाहिए। अंधा अमावस की रात के साथ तो तल्लीन हो सकता है, मगर पूर्णिमा की रात के साथ बेचैन हो जाएगा। पूर्णिमा की रात उसे उसके अंधेपन की याद दिलाएगी; अमावस की रात अंधेपन को भुलाएगी, याद नहीं दिलाएगी।

मिठास के आदी हो गए

तुम कहते हो, 'जीवन के हर आयाम में सत्य के सामने झुकना मुश्किल है।' यह सच है, क्योंकि सत्य के सामने झुकने का अर्थ होता है अहंकार को विसर्जित करना। लेकिन दूसरी बात सच नहीं है जो तुम कहते हो कि झूठ के सामने झुकना सरल क्यों है? झूठ के सामने झुकना ही नहीं पड़ता; झूठ तो बहुत जी-हजूर है। झूठ तो सदा तुम्हारे सामने झुका हुआ खड़ा है, तुम्हारे पैरों में बैठा है। झूठ तो गुलाम है। झूठ के साथ दोस्ती आसान, क्योंकि झूठ तुम्हें रूपांतरित करने की बात ही नहीं करता। झूठ तो कहता है कि तुम हो ही, जो होना चाहिए वही हो, उससे भी श्रेष्ठ तुम हो। झूठ तुम्हारी प्रशंसा के पुल बांधता है। झूठ तुम्हें बड़ी सांत्वना देता है और कितने-कितने झूठ हमने गढ़े हैं! इतने झूठ कि अगर तुम खोजने चलो तो घबड़ा जाओ! सत्य तो एक है, झूठ अनंत हैं। झूठ अनेक हैं। जैसे स्वास्थ्य एक है और बीमारियां अनेक हैं, ऐसे ही सत्य एक है और सत्य तुम्हें फुसलाएगा नहीं, तुम्हारी खुशामद नहीं करेगा। सत्य तो कड़वा मालूम पड़ेगा, क्योंकि तुम झूठ की मिठास के आदी हो गए हो। 

जोखिम उठाने की हिम्मत 

झूठ तो अपने ऊपर शक्कर चढ़ाकर आएगा। सत्य तो जैसा है वैसा है- नग्न! जो लोग झूठ के आदी हो गए हैं, वे सत्य से तो आंखें चुराएंगे; सत्य उनकी जीभ को जमेगा ही नहीं। सत्य तो उन्हें बहुत तिक्त मालूम होगा, कड़वा मालूम होगा। झूठ तुम्हारे अहंकार को पुष्ट करते है। इसलिए झूठ को स्वीकार कर लेना, आसान है; आसान क्या सुखद है, प्रीतिकर है। सत्य को स्वीकार करने के लिए साहस चाहिए। सत्य को स्वीकार करने के लिए साहस ही नहीं, दुस्साहस चाहिए! सत्य को स्वीकार करने के लिए जोखिम उठाने की हिम्मत चाहिए इसलिए सत्य के सामने कोई झुकता नहीं। झुकना पड़ेगा! झुकना कौन चाहता है? कोई नहीं झुकना चाहता। सत्य के सामने झुकने को जो राजी है, वही धार्मिक व्यक्ति है। मैं उसी को संन्यासी कहता हूं, लेकिन सत्य के सामने वही झुक सकता है, जिसके भीतर ध्यान की किरण उतरी हो और जिसने देखा हो कि मैं तो हूं ही नहीं। बस उस मैं के न होने में ही झुकना है। झुकना कोई कृत्य नहीं है। झुकना तुम्हारा कोई संकल्प नहीं है। 

आचरण अपने आप बदलता

अगर कृत्य है, अगर संकल्प है, तो कर्ता फिर निर्मित हो जाएगा, फिर अहंकार बन जाएगा। तुम्हारे भीतर एक नया अहंकार पैदा हो जाएगा कि देखो मैं कितना विनम्र हूं, कैसा झुक जाता हूं, जगह-जगह झुक जाता हूं, मुझसे ज्यादा विनम्र कोई भी नहीं!इसलिए मैं अपने संन्यासियों को नहीं कहता कि तुम अपने आचरण को ऐसा करो, वैसा करो; यह खाओ, वह पियो; इतने बजे उठो, इतने बजे मत उठो। मैं अपने संन्यासियों को सिर्फ एक बात कह रहा हूं, सिर्फ एक औषधि कि तुम ध्यान में उतरो। ध्यान तुम्हें सत्य के सामने खड़ा कर देगा, फिर तुम्हारे जीवन में क्रांति होनी शुरू होगी- जो तुम करोगे नहीं, होगी ही और उस बात का सौंदर्य ही और है, जब तुम्हारा आचरण अपने आप बदलता है, जब तुम्हारे आचरण में अपने आप आभा आती है! थोप-थोपकर, जबरदस्ती ऊपर से बिठाकर, किसी तरह संभालकर जो आचरण बनाया जाता है, वह पाखंड है। लेकिन सदियों से तुम्हें पाखंड सिखाया गया है धर्म के नाम पर, नीति के नाम पर, इसलिए मैं तुम्हें उस पाखंड को छोड़ देने के लिए कहता हूं।

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Web Title:According to spiritual master Osho Rajneesh there are many lies but truth is just one(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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