लोहाघाट। युग पुरुष स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से उनके अनुयाईयों द्वारा एक शताब्दी पूर्व लोहाघाट के निकट घने जंगलों के बीच मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना की गई। स्वामी जी के शिष्य सेवियर दंपत्ति द्वारा इस आश्रम का निर्माण 19 मार्च 1899 में कराया गया।

आश्रम में स्वामी विवेकानंद का पदार्पण 3 जनवरी 1901 को हुआ था। तब स्वामी जी काठगोदाम से वाया देवीधुरा होते हुए लगभग 173 किमी की दुर्गम पैदल यात्रा कर अपने अनुयायियों के साथ मायावती पहुंचे थे। दो सप्ताह के प्रवास के दौरान स्वामी जी ने यहां ध्यान एंव वेदांत की रसधारा प्रवाहित करते हुए इस आश्रम को अद्वैत भाव से जोड़ा। तभी से यह आश्रम एक तीर्थ के रूप में विख्यात हो गया।

नर रूप में नारायण की सेवा के लिए स्थापित यह आश्रम आज भी अपने उद्देश्यों पर खरा उतर रहा है। आश्रम द्वारा गरीबों, असहाय व दलितों के उत्थान के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम व शिविर संचालित कर उनकी सेवा की जा रही है। शिक्षा के प्रचार प्रसार के साथ लोगों को बेहतर स्वास्थ सुविधा दिलाने के लिए यह आश्रम मील का पत्थर साबित हो रहा है। आश्रम की स्थापना के बाद पहले अध्यक्ष के रूप में स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कार्यभार संभाला। आश्रम का संचालन श्री रामकृष्ण मठ एवं मिशन बेल्लूर द्वारा किया जाता है।

आज भी स्वामी जी के अनुयाई अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, रूस, जापान, आस्ट्रेलिया सहित देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से यहां पहुंचकर आध्यात्मिक ऊर्जा ग्रहण करते हैं। आश्रम स्थल से दिखने वाली हिमालय की लम्बी पर्वत श्रृखंलाएं व शांत वादियां बरबस ही लोगों को अपने ओर खींच लेती हैं। वर्तमान में आश्रम के अध्यक्ष स्वामी बोधसारानंद जी महाराज की प्रेरणा से आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए उम्दा व्यवस्था के साथ स्वामी जी के मिशन को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। प्रतिवर्ष देश विदेश के ख्याति प्राप्त चिकित्सकों को बुलाकर आश्रम के धमार्थ अस्पताल में चिकित्सा शिविर आयोजित कर हजारों मरीजों का निशुल्क उपचार करवाया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों व विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिविर आयोजित कर स्वामीजी के आदर्शो पर चलने की प्रेरणा दी जा रही है। गरीबों को निशुल्क कपडे़ आदि वितरण कर युवा वर्ग को शैक्षिक रूप से मजबूत होने की प्रेरणा दी जा रही है। आश्रम से संतों द्वारा स्वामी जी के मिशन को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।

प्रबुद्ध भारत पत्रिका का होता है संपादन- स्वामी जी की प्रेरणा से वर्ष 1896 में प्रबुद्ध भारत पत्रिका का प्रकाशन किया गया। पत्रिका में धर्म, दर्शनशास्त्र, कला, विज्ञान, सामाजिक प्रथाएं तथा जनहित से संबंधित लेख आदि प्रकाशित किए जाते हैं। इस पत्रिका का लम्बे समय तक मायावती से ही प्रकाशन किया गया लेकिन अब प्रकाशन बेलुर मठ कोलकात्ता से किया जाता है पर सम्पादकीय कार्य आज भी मायावती आश्रम से ही किया जाता है।

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