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Durga Ashtami 2026: त्रिपुष्कर योग में करें देवी मां दुर्गा की पूजा, कष्टों का होगा अंत और बढ़ेगा मान-सम्मान

Published: Sun, 15 Feb 2026 01:00 PM (IST)

24 फरवरी को फाल्गुन माह की मासिक दुर्गा अष्टमी है, जो मां दुर्गा को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने ...और पढ़ें

Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी का धार्मिक महत्व

Durga Ashtami 2026: दुर्गा अष्टमी का धार्मिक महत्व

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 24 फरवरी को फाल्गुन माह की दुर्गा अष्टमी है। यह दिन जगत की देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर जगत जननी मां दुर्गा की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

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ज्योतिषियों की मानें तो फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर त्रिपुष्कर योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योग में देवी मां दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आएगी। साथ ही सभी कष्टों का अंत होगा। आइए, शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-


मासिक दुर्गा अष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Durga Ashtami Shubh Muhurat)

अष्टमी तिथि आरंभ- 24 फरवरी को सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर
अष्टमी तिथि समापन- 25 फरवरी को सुबह 04 बजकर 51 मिनट पर

दुर्गा अष्टमी महत्व

सनातन धर्म में दुर्गा अष्टमी का खास (Goddess Durga Puja Rituals) महत्व है। इस शुभ अवसर पर बढ़ी संख्या में साधक न केवल घर पर, बल्कि मंदिर जाकर भी जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा करते हैं। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही देवी मां कृपा से जातक को जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, शत्रु भय समाप्त हो जाता है।

त्रिपुष्कर योग

ज्योतिष गणना अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग में देवी मां दुर्गा की पूज-भक्ति और साधना करने से साधक के सकल मनोरथ सिद्ध होंगे। साथ ही करियर और कारोबार में मनमुताबिक सफलता मिलेगी। ज्योतिष शुभ कामों को शुरू करने के लिए त्रिपुष्कर योग को श्रेष्ठ (Tripushkar Yoga Benefits) मानते हैं।


इंद्र योग

फाल्गुन माह की दुर्गा अष्टमी (Astrological Significance of Tripushkar) तिथि पर इंद्र योग का भी निर्माण हो रहा है। इंद्र योग का संयोग सुबह 07 बजकर 24 मिनट तक है। इस योग में शिव-शक्ति की पूजा करने से साधक के जीवन में सुखों को आगमन होगा।

पंचांग

  • सूर्योदय - सुबह 06 बजकर 51 मिनट पर
  • सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 18 मिनट पर
  • चंद्रोदय- सुबह 10 बजकर 58 मिनट से...
  • चन्द्रास्त- देर रात 01 बजकर 40 मिनट तक
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 11 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 40 मिनट तक
  • निशिता मुहूर्त - रात 12 बजकर 09 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।