आंख बंद करके मंत्र जपने का 'दैवीय' रहस्य, इन अद्भुत नियम और फायदों के बारे में नहीं जानते होंगे आप
सनातन धर्म में मंत्र जाप करते समय आंखें बंद करना ध्यान केंद्रित करने और मन को भटकने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

आंखें बंद करके मंत्र जाप: एकाग्रता और आध्यात्मिक लाभ का मार्ग (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
आंखें बंद करने से मंत्र जाप में एकाग्रता बढ़ती है।
मन भटकने से रुकता है, ईश्वर से गहरा जुड़ाव होता है।
शरीर के चक्र सक्रिय होते हैं, मंत्र ऊर्जा प्रवाहित होती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूजा-पाठ के कई नियम बनाए गए हैं जिनजा पालन जरूरी माना जाता है। पूजा करते समय ईश्वर में ध्यान केंद्रित करना और हाथ जोड़कर ईश्वर का ध्यान करना अत्यंत जरूरी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी हम पूजा करें, तो मन भटकने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। उसी तरह से पूजा के समय मंत्र जाप करना भी एक जरूरी नियम है, जिसका पालन हम रोज करते हैं।
पूजा के समय मंत्रों का जाप करना ईश्वर के और आपस आने का एक माध्यम माना जाता है। आपने अक्सर यह भी सुना होगा कि मंत्रों का जाप सही तरीके से करना चाहिए जिससे आपको उसका पूर्ण लाभ मिले।
वहीं मंत्र जाप करते समय आपको आंखें भी बंद करनी चाहिए। यह आपके मन को भटकने से रोकने की एक प्रक्रिया है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्यों मंत्रों का जाप करते समय आंखें बंद कर लेनी चाहिए और इसके क्या लाभ हैं?
मंत्रों का जाप आंखें बंद करके ही क्यों करना चाहिए?
मंत्रों का जाप हमेशा आंखें बंद करके ही करने की सलाह दी जाती है और ऐसा माना जाता है कि आंखें बंद करके मंत्र जपने से ध्यान केंद्रित होता है और आप जिस उद्देश्य से मंत्र जप रहे हैं उसको पूरा करने में मदद मिलती है।
इस तरह से मंत्र जपने से मंत्रों को पढ़ने में कोई बाधा नहीं आती है और भक्त को पूजा का फल भी मिलता है। बंद आंखों से मंत्र जाप करने से शरीर के सभी चक्र एक साथ केंद्रित होते हैं और यह इस बात का संकेत होता है कि आप जिस मंत्र का भी जाप कर रहे हैं उसकी ऊर्जा शरीर के हर एक हिस्से में प्रवाहित होगी।
आंख बंद करके मंत्रों को जपने से नहीं होता है भटकाव
जब आप किसी मंत्र का जाप आंख बंद करके करते हैं तब मन उसी मंत्र में लग जाता है और किसी भी तरह से भटकाव की स्थिति नहीं होती है।
आप मंत्र जपते समय जब आंखें बंद करके दोनों आंखों के बीच में ध्यान केंद्रित करते हैं, तो सीधे ईश्वर के साथ जुड़ाव होता है। मंत्रों का जाप आमतौर पर 108 बार किया जाता है जिसमें आप कम से कम एक पूरी माला को जपते हैं।
ऐसे में पूरी माला का जाप एक बार में ही हो जाता है और किसी तरह की बाधा नहीं आती है। मन को अत्यंत चंचल माना जाता है, इसलिए अगर आप आंखें खोलकर मंत्र का जाप करते हैं तो आपका मन मस्तिष्क पूरी तरह से एक ही जगह केंद्रित नहीं हो पाता है।
मंत्र जाप के नियम क्या हैं?
आप जब भी मंत्र जाप करते हैं, उसके कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है जिससे उस मंत्रजाप का पूर्ण फल मिले-
- आप जिस मंत्र का जाप करना चाहते हैं उसका संकल्प लें और यह निर्धारित करें कि आपको कितनी बार इसका जाप करना है।
- धीरे-धीरे मंत्र शुरू करें और अपनी धीरे-धीरे या मन ही मन मंत्र को जपना शुरू करें।
- इसके लिए एक ऐसा स्थान चुनें जहां ज्यादा शोर न हो और शांति बनी रहे। शांत माहौल में आप मंत्र का जाप निष्ठा से कर पाते हैं।
- मंत्र का जाप करते समय आंखों को बंद करके एक माला लें और जाप शुरू करें।
- मंत्रों को मन ही मन दोहराएं और बाहर भी उच्चारण करते हुए मंत्र पढ़ें।
अगर आप भी मंत्र का जाप करते हैं, तो यहां बताए नियमों का पालन जरूरी माना जाता है। ऐसा करने से आपके ऊपर ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
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