पुष्‍पदत्‍त की अनोखी कहानी

इसको लेकर एक दंतकथा है। पुष्पदत्त नामक गन्धर्वों का एक राजा था। वह भोलेनाथ का अनन्य भक्त था। इस राजा की आदत थी कि वह भगवान शिव को प्रतिदिन पुष्‍प अर्पित करता था। उत्तम सुगंध वाले फूल लाने के लिए राजा किसी अन्य राजा की पुष्प वाटिका में जाया करता था और वहां से प्रतिदिन सुंदर-सुंदर फूल चुरा लाता था। रोजाना फूलों की चोरी होता देख माली काफी परेशान रहता। उसे बगीचे में किसी को आते-जाते न देख कर हैरानी होती। उसने इस संबंध में राजा से बातचीत की तथा फूलों की हो रही प्रतिदिन चोरी को रोकने के लिए एक गुप्तचर की व्यवस्था की जो निगरानी रखेगा कि कौन बगीचे से अच्छे-अच्छे फूल चोरी करता है परंतु गुप्तचर नियुक्त करने के बाद भी चोरी ऐसे ही होती रही, क्‍योंकि पुष्‍पदत्‍त को अदृश्‍य होने की शक्‍ित मिली थी। 
निर्मली का ना करें उल्‍लंघन
एक बार जब गन्धर्वराज भगवान शिव भोले नाथ की पूजा अर्चना कर रहा था तो वह भूलवश शिवलिंग की निर्मली, जिस स्‍थान से जल प्रवाहित होता है, उसको लांघ गया जिसके फलस्वरूप उसके अदृश्य होने की शक्ति समाप्त हो गई जिसका उसे पता भी नहीं चला। जब वह दूसरे दिन पुष्प वाटिका में पुष्प लेने गया तो उसे पुष्प तोड़ते माली के रखे हुए गुप्तचर ने पकड़ लिया। उसने अदृश्य होने का प्रयास किया जिसमें वह सफल न हो सका। किसी तरह वह वहां से छूट गया। अगली सुबह पूजा में जब उसने भगवान से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि उसकी अदृश्य होने की शक्ति लुप्त होने का क्‍या रहस्‍य है। अत जब भी भोले नाथ्‍ज्ञ की पूजा करें ध्‍यान रखें की उनकी निर्मली का उल्‍लंघन ना हो। 
 

Posted By: Molly Seth