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घर में किसी की मृत्यु के बाद कुछ दिनों तक धार्मिक किताबें क्यों नहीं पढ़ी जातीं? क्या कहते हैं धर्मशास्त्र

Published: Mon, 21 Sep 2026 04:46 PM (IST)

हिंदू धर्म में परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद 13 दिनों के सूतक काल में धार्मिक ग्रंथों का ...और पढ़ें

मृत्यु के बाद धार्मिक पुस्तकें न पढ़ने के कारण (Picture Credits- AI Images)

मृत्यु के बाद धार्मिक पुस्तकें न पढ़ने के कारण (Picture Credits- AI Images)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू घरों में अक्सर जिन घरों में परिवार के किसी सदस्य की मौत हो जाने पर कई तरह के धार्मिक अनुष्ठानों और नियमों का पालन किया जाता है। घर में किसी की मृत्यु होने के बाद सूतक काल की वजह से कुछ दिनों तक पूजा-पाठ, अनुष्ठान या धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से बचा जाता है। आखिर क्या है ऐसा करने के पीछे का कारण आइए जानते हैं एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से।

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, हिंदू धर्मग्रंथों और गरुड़ पुराण के अनुसार परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद 13 दिनों की अवधि को सूतक काल माना जाता है। इस दौरान परिवार के सदस्यों में सूतक जनित शारीरिक व मानसिक अशुद्धि मानी जाती है।

सूतक काल में धार्मिक ग्रंथ न पढ़ने के मुख्य कारण

पवित्रता और एकाग्रता का नियम

धार्मिक पुस्तकों जैसे वेद, रामायण और भगवद्गीता के पाठ के लिए मन की एकाग्रता तथा बाह्य व आंतरिक पवित्रता अनिवार्य होती है।

शोकग्रस्त स्थिति

सूतक काल में परिजनों की स्थिति अत्यंत शोकग्रस्त होती है, जिससे वे मंत्रों और शास्त्रों के पाठ का नियमपूर्वक पालन करने में असमर्थ होते हैं।

आत्मा की शांति का समय

यह समय केवल मृत आत्मा की शांति और उसकी पारलौकिक यात्रा के निमित्त समर्पित होता है, इसलिए इस अवधि में केवल गरुड़ पुराण का श्रवण किया जाता है।

अन्य नियम और वर्जन

सूतक समाप्त होने (13वें दिन की पूजा और शुद्धि) के पश्चात ही पुनः नियमित धार्मिक ग्रंथों का पाठ आरंभ किया जाता है। इसके अलावा, एक वर्ष या कम से कम 6 महीनों तक धार्मिक यात्रा करना भी वर्जित माना जाता है।

गरुड़ पुराण ही क्यों पढ़ा जाता है?

सनातन धर्म के 18 महापुराणों से एक गरुड़ पुराण, जिसमें भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच हुए संवाद का उल्लेख देखने को मिलता है। गरुड़ पुराण कथा के मुताबिक, गरुड़ देव ने भगवान विष्णु से मृत्यु, आत्मा की यात्रा, कर्मों का परिणाम और मृत्यु के बाद की स्थिति से जुड़े कई तरह के सवाल किए थे।

भगवान विष्णु द्वारा दिए गए उत्तरों को ही गरुड़ पुराण का आधार बताया जाता है। इसमें सिर्फ मौत के बाद की बातों का उल्लेख नहीं है, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने, धर्म का पालन करने और सही कार्य करने पर जोर दिया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।