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दाह संस्कार के बाद क्यों मुंडवाया जाता है सिर? इसके पीछे छिपा है बड़ा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

Published: Tue, 23 Jun 2026 05:50 PM (IST)

हिंदू धर्म में दाह संस्कार के बाद सिर मुंडवाने की परंपरा के पीछे गहरे धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण हैं। ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार और मुंडन का गहरा नाता (Picture Credit- AI Generated)

अंतिम संस्कार और मुंडन का गहरा नाता (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक के 16 संस्कारों को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इनमें से आखिर संस्कार बेहद अहम माना जाता है। जब परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके दाह संस्कार किए जाने के बाद घर के पुरुष (खासकर बेटा) और करीबी रिश्तेदार सिर के बाल मुंडवा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर दाह संस्कार के बाद मुंडन क्यों करवाया जाता है? अगर नहीं पता, तो ऐसे आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार इस लेख में आपको बताते हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण।

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ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा ने बताया है कि दाह संस्कार के बाद पुरुषों द्वारा मुंडन कराने के पीछे गहरे धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं:

अहंकार और मोह का त्याग: धार्मिक दृष्टि से, बाल व्यक्ति के अहंकार, मोह और सांसारिक जुड़ाव का प्रतीक माने जाते हैं। परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर मुंडन करवाकर व्यक्ति मृत आत्मा के प्रति सम्मान, शोक और अपना अहंकार त्यागकर समर्पण व्यक्त करता है। यह इस बात का भी प्रतीक है कि हम इस संसार में खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे।

शोक की सामाजिक पहचान: प्राचीन समय में पूरे परिवार के सदस्यों का मुंडन कराया जाता था। इसका एक बड़ा व्यावहारिक कारण यह भी था कि समाज में शोकाकुल परिवार की आसानी से पहचान हो जाती थी, जिससे लोग उनके प्रति संवेदनशीलता बनाए रखते थे।

शारीरिक और मानसिक शुद्धि: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, श्मशान घाट और दाह संस्कार के समय वातावरण में कई तरह के बैक्टीरिया और नकारात्मक ऊर्जा मौजूद होती है, जो बालों में आसानी से समा सकती है। मुंडन कराने से शरीर की पूर्ण शुद्धि होती है और संक्रमण का खतरा समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही, मुंडन कराने से मस्तिष्क को शीतलता मिलती है, जो शोक के समय मानसिक तनाव और दुख को सहन करने में सहायक होती है।

मुंडन किसे करवाना चाहिए- मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति को मुंडन जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा मृतक के सभी पुत्रों को भी मुंडन करवाना जरूरी होता है।

मुंडन कब होता है?

  • परंपराओं के अनुसार, मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति अंतिम संस्कार से ठीक मुंडन करवाता है।
  • इसके अलावा परिवार के अन्य पुरुष मृत्यु के दसवें दिन पवित्र स्थान पर मुंडन करवाते हैं। इस दौरान बालों के साथ-साथ दाढ़ी और मूंछ भी पूरी तरह से साफ करवाई जाती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।