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भोजन से पहले पानी का आचमन शुभ क्यों माना जाता है? सिर्फ परंपरा नहीं, इसके पीछे छिपे हैं कई रहस्य

Published: Sun, 04 Oct 2026 12:50 PM (IST)

हिंदू धर्म में भोजन से पहले थाली के चारों ओर जल का आचमन करना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। यह भोजन ...और पढ़ें

भोजन से पहले आचमन: स्वास्थ्य और शुद्धि का गहरा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

भोजन से पहले आचमन: स्वास्थ्य और शुद्धि का गहरा रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. भोजन से पहले जल आचमन की सदियों पुरानी परंपरा।

  2. यह भोजन को शुद्ध कर अमृत समान बनाता है।

  3. आचमन से रोग-दोष दूर होते हैं और ईश्वरीय कृपा मिलती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भोजन करने के कुछ प्रमुख नियम बनाए गए हैं जिनका पालन जरूरी होता है। ऐसे ही नियमों में से एक है भोजन से पहले थाली के चारों और पानी का आचमन करना।

भोजन से पहले जल से चारों ओर आचमन करने को इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि इसे शरीर के सभी तत्वों को मजबूत करने के एक माध्यम माना जाता है।

आचमन का अर्थ है कि आप भोजन शुरू करने से पहले अपनी हथेली पर जल लेकर भोजन की थाली के चारों ओर घुमाते हुए आस-पास छिड़कें। इसके बाद ईश्वर को भोग लगाकर ही उस भोजन को ग्रहण करें। ऐसा करने से उस भोजन में ईश्वरीय कृपा होती है और उस भोजन का महत्व बढ़ जाता है। आइए आपको बताते हैं इसके महत्व के बारे में।

जल का आचमन करने का महत्व

अक्सर देखा जाता है कि घर के बड़े-बुजुर्ग भोजन करने के पहले और बाद में जल से आचमन करते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भोजन का शुद्धिकरण करना होता है। यह इसलिए किया जाता है कि यदि थाली के आस-पास कोई जीव मौजूद हों हो वो अपने आप ही जल के छींटों से दूर हट जाते हैं।

आचमन के लिए भोजन शुरू करने से पहले हाथ में थोड़ा-सा जल लेकर पहले तीन बार उसे खाने की थाली के चारों ओर घुमाया जाता है फिर उसके बाद आंखें बंद करके ईश्वर का आह्वाहन किया जाता है। इसी दौरान भोजन मंत्र का उच्चारण करते हुए भोजन आरंभ किया जाता है। आचमन किया हुआ भोजन अमृत समान बन जाता है और इससे किसी भी तरह की अशुद्धियां दूर हो जाती हैं।

सदियों से चली आ रही है परंपरा

भोजन शुरू करके से पहले थाली के चारों ओर आचमन करने की परंपरा सदियों पुरानी है। दरअसल, पुराने समय में ज्यादातर मकान कच्चे होते थे और लोग जमीन पर बैठकर भी भोजन करते थे।

ऐसे में भोजन से पूर्व लोग आस-पास जल से आचमन कर देते थे जिससे आस-पास मौजूद धूल के कण भोजन में न पड़ें। यही नहीं कई बार कच्ची मिट्टी की वजह से भोजन की थाली के आस-पास कीड़े-मकौड़े भी आने लगते थे, ऐसे में कीड़ों से बचने के लिए भोजन की थाली के आस-पास पानी से आचमन जरूरी होता था।

भोजन की शुद्धि और आचमन की विधि

  • भोजन से पहले आचमन करने के लिए एक मुख्य तरीका यह है कि सबसे पहले आपको अपने मुख की शुद्धि करनी चाहिए। इसलिए भोजन शुरू करने से पहले ही जल से कुल्ला करें।
  • उसके बाद आप एक साफ स्थान पर भोजन की थाली रखें और स्वयं भी बैठें। अपनी आंखों को बंद करें और ईश्वर का आह्वाहन करें।
  • हाथ में थोड़ा सा जल लेकर थाली के चारों और आचमन करें और भोजन को शुद्ध करें।
  • भोजन का पहला ग्रास निकालकर ईश्वर के नाम से रख दें। इसके बाद आप स्वयं भी भोजन ग्रहण करें।

अगर आप इस तरह से भोजन करते हैं और आचमन करते हैं, तो ऐसा भोजन पवित्र हो जाता है और इसके भोग से सभी रोग-दोष दूर रहते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।