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धन की देवी क्यों हुईं थीं ब्राह्मणों से नाराज? जानें भृगु ऋषि की वो बड़ी भूल

Published: Sun, 17 May 2026 06:18 PM (GMT+05:30)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, धन की देवी माता लक्ष्मी ने एक बार पूरे ब्राह्मण समाज को एक श्राप दे दिया था। आइए उस कथा को पढ़ते हैं।

Mythology: माता लक्ष्मी ने क्यों दिया था ब्राह्मणों को श्राप?

Mythology: माता लक्ष्मी ने क्यों दिया था ब्राह्मणों को श्राप?

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म की पौराणिक कथाएं जीवन के कई बड़े रहस्यों के बारे में हमें बताती हैं। ऐसा ही एक बेहद रोचक और हैरान कर देने वाली कथा है कि धन की देवी माता लक्ष्मी द्वारा ब्राह्मणों को श्राप दिया गया।

वैसे तो ब्राह्मणों को पूजनीय और पूज्य माना जाता है, लेकिन एक बार किसी वजह से माता लक्ष्मी उनसे इतनी क्रोधित हो गईं थीं कि उन्होंने पूरे ब्राह्मण समाज को ही श्राप दे दिया था।

आइए इस पौराणिक कथा के पीछे की असली वजह जानते हैं। इस कथा का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के दसवें स्कंध, अध्याय 89 में मिलता है। इसके अलावा इसका वर्णन पद्म पुराण के उत्तर खंड में भी है।

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त्रिदेवों की परीक्षा 

यह कथा तब की है जब ऋषियों के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई कि त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) में सबसे श्रेष्ठ और शांत स्वभाव का कौन है? इसके समाधान के लिए महर्षि भृगु को तीनों देवों की परीक्षा लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

महर्षि भृगु सबसे पहले ब्रह्मलोक और फिर शिवलोक गए, लेकिन दोनों ही स्थानों पर वे संतुष्ट नहीं हुए। अंत में, वे भगवान विष्णु की परीक्षा लेने के लिए क्षीरसागर पहुंचे।

शयानं श्रिय उत्संगे शयनं च गतोऽच्युतम् ।
प्रत्यागतं महाभागो न्यहनत् पादमुरसा ॥ १० ॥

विष्णु जी की छाती पर पैर से प्रहार

जब महर्षि भृगु क्षीरसागर पहुंचे, तो भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन थे और माता लक्ष्मी उनके चरण दबा रही थीं। महर्षि भृगु ने भगवान विष्णु को जगाने और उनके धैर्य की परीक्षा लेने के लिए उनके वक्षस्थल यानी छाती पर अपने पैर से प्रहार कर दिया। योगनिद्रा से जागने पर भगवान विष्णु क्रोधित होने के बजाय उठ खड़े हुए और उन्होंने महर्षि भृगु के पैर पकड़ लिए।

श्रीहरि ने बड़े शांत भाव से कहा कि है ऋषिवर आपके पैर बहुत कोमल हैं और मेरी छाती वज्र के समान कठोर है, कहीं आपके पैरों में चोट तो नहीं लगी?

यस्मात्ताडितवान् क्रोधाद्विष्णुं सर्वेश्वरं प्रभुम् ।
तस्मादद्यारभ्य विप्राः सर्वे वै भृगुनन्दन ॥
दरिद्राश्च भविष्यन्ति सदा भिक्षाभुजो द्विजः ।

माता लक्ष्मी का भयंकर क्रोध और श्राप

भगवान विष्णु के इस शांत भाव को देखकर महर्षि भृगु खुश हो गए और उन्होंने श्रीहरि को त्रिदेवों में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया। लेकिन, भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर साक्षात माता लक्ष्मी वास करती हैं। अपने स्वामी और अपने निवास स्थान पर एक ब्राह्मण द्वारा पैर से प्रहार किए जाने को माता लक्ष्मी सहन नहीं कर सकीं। वे भृगु ऋषि से बहुत क्रोधित हो गईं।

माता लक्ष्मी ने उसी क्षण महर्षि भृगु और पूरी ब्राह्मण जाति को श्राप देते हुए कहा कि हे महर्षि आपने घमंड में आकर मेरे स्वामी का अपमान किया है। इसलिए मैं आज से आपके पूरे कुल और ब्राह्मण समाज को श्राप देती हूं कि मैं कभी भी ब्राह्मणों के घर स्थिर होकर वास नहीं करूंगी। ब्राह्मणों को धन के लिए हमेशा दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ेगा और वे सदा अभाव में जिएंगे।

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