रावण की लंका में रहकर भी सीता का साथ देती थीं सरमा, कौन थी विभीषण की पत्नी?
सरमा, विभीषण की पत्नी, रामायण की एक महत्वपूर्ण पात्र थीं, जो अपनी दयालुता और निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। ...और पढ़ें

विभीषण की पत्नी सरमा
HighLights
विभीषण की पत्नी सरमा, रामायण की महत्वपूर्ण पात्र थीं।
अशोक वाटिका में सीता को सांत्वना दी, हनुमान की खबर दी।
रावण के छल से सीता को बचाया, विभीषण ने सौंपा दायित्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण महाकाव्य में ऐसे कई प्रमुख पात्र हैं जिनका जिक्र काफी कम किया जाता है, लेकिन इनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। इन्हीं पात्रों में से एक पात्र जिसे विभीषण की पत्नी 'सरमा' के नाम से जाना जाता है। रामायण में उनकी भूमिका काफी अहम रही है, जिन्हें उनके सच्चे कर्तव्य और वफादारी के लिए जाना जाता है।
लंका राक्षस राजा के भाई विभीषण की पत्नी का नाम सरमा था, जिन्हें आदर्शवादी और समर्पित पत्नी के रूप में देखा जाता है। विभीषण अपने भाई से बिल्कुल विपरीत प्रवृत्ति का था, जिसे नेक और अच्छे इंसान के तौर पर दिखाया गया है। विभीषण के गुणों से मेल खाती उनकी पत्नी सरमा भी काफी दयालु और हमदर्द स्वभाव की थी।
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माता सीता को सांत्वना देने वाली सरमा
रामायण काल में सरमा की भूमिका से जुड़ा एक खास किस्सा है, जब माता सीता लंका में कैद थी। जब सीता अशोक वाटिक में बंदी थीं और राम वियोग में व्याकुल थीं तो उन्हें सरमा के रूप में एक अच्छा साथी मिला। सीता की परेशानी तब और बढ़ गई जब उन्हें पता चला कि हनुमान जी को रावण के बेटे इंद्रजीत ने बंदी बना लिया था। उनके पकड़े जाने पर माता सीता काफी चिंतित हो उठी।
सरमा, माता सीता की परेशानी देखकर, उन्हें सांत्वना देने के लिए आगे आती हैं। वह हनुमान जी के सफलतापूर्वक भागने और लंका दहन की खबर भी बताती हैं। यह जानने के बाद माता सीता को न सिर्फ हनुमान जी की सुरक्षा का भरोसा होता है, बल्कि उनकी उम्मीद भी जागती है जिससे पता चलता है कि राम की सेना मजबूत और काबिल भी है।
सरमा रूप बदलने में माहिर
रामायण महाकाव्य के मुताबिक, जब रावण राम का नकली कटा हुआ सिर और धनुष सीता मां के पास लाता है, तो सरमा पक्षी का रूप बदलकर उसे पता चल जाता है कि रावण नकली सिर और धनुष दिखा रहा है। सीता जो राम को मरा हुआ समझकर प्राण त्याग देना चाहती थी, उसे सरमा ने शांत कर बताया कि राम अपनी सेना के साथ पहले से ही लंका में है और सही सलामत है।
विभीषण ने सरमा को दिया दायित्व
सरमा से जुड़ा एक और खास पल विभीषण के रावण का साथ छोड़कर राम जी की शरण में चले जाने से जुड़ा है। विभीषण अपने भाई की गलतियों से चिंतित होकर सीता को वापस न करने की वजह से लंका के विनाश को देखकर राम के पास जाने का फैसला करते हैं।
लंका छोड़ने से पहले विभीषण अपनी पत्नी सरमाको एक जरूरी काम सौंपते हैं। वह उनसे लंका में ही रहकर सीता को साथ और सहारा देने के लिए कहते हैं। यह विनती सरमा पर विभीषण के भरोसे और वफादारी को दिखाता है, क्योंकि वह जानते थे कि वह सीता का ख्याल रखेंगी और हालात के मुताबिक से जितना हो सकें उनकी रक्षा व मदद करेंगी।
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