विकट संकष्टी की पूजा में चढ़ाएं कुछ खास चीजें, सभी बाधाएं दूर करेंगे बप्पा
विकट संकष्टी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी समस्त बाधाएं दूर हो जाती हैं और साधक को सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

विकट संकष्टी चतुर्थी पर करें गणेश जी की विशेष पूजा (AI Generated Image)
HighLights
5 अप्रैल को मनाई जाएगी विकट संकष्टी चतुर्थी
गणेश जी को चढ़ाएं दूर्वा, मोदक और सिंदूर
गणेश जी की पूजा में न करें तुलसी का प्रयोग
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी के रूप में जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके निमित्त व्रत किया जाता है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में विकट रूप भी शामिल है। गणेश जी के इस स्वरूप की पूजा करने से समस्त प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक एवं दुर्घटनाओं से मुक्ति मिल सकती है।
गणेश जी का पूजा मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं चतुर्थी तिथि का समापन 6 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर होगा। ऐसे में विकट संकष्टी 5 अप्रैल को मनाई जाती है। इस दिन चंद्रोदय के बाद व्रत खोला जाता है। ऐसे में संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय कुछ इस प्रकार रहेगा -
संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय - रात 9 बजकर 58 मिनट तक

(AI Generated Image)
गणेश जी को प्रिय हैं ये चीजें
विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा में आप गणेश जी को ये चीजें जरूर चढ़ाएं -
- बप्पा को पूजा के दौरान 'दूर्वा' (हरी घास) और लाल सिंदूर जरूर अर्पित करें।
- आप पूजान में लाल या पीले रंग के वस्त्र और जनेऊ भी अर्पित कर सकते हैं।
- पूजा में नारियल, हल्दी की गांठ और सुपारी चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
- बप्पा को मीठा बहुत पसंद है। ऐसे में आप उन्हें उनके पसंदीदा भोग जैसे मोदक, बेसन के लड्डू और मीठी पूरन पोली अर्पित कर सकते हैं।
जरूर करें ये काम
शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी की पूजा में 21 दूर्वा अर्पित करना बहुत ही शुभ माना गया है। दूर्वा अर्पित करने के लिए सबसे पहले दूर्वा की 21 गांठें बनाएं और 'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि' मंत्र का जप करते हुए गणेश जी को अर्पित करें। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी पर शमी के पेड़ की पूजा करें और इसके पत्ते बप्पा को चढ़ाएं। ऐसा करने से करियर और धन संबंधी समस्याओं से आपको छुटकारा मिल सकता है।

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भूलकर भी न करें ये गलतियां
पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन जरूर करें, वरना पुण्य की जगह आपको दोष भी लग सकता है -
संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा में तुलसी का पत्ता न चढ़ाएं। पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी और गणेश जी ने एक-दूसरे को श्राप दिया था, इसलिए उनकी पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके साथ ही पूजा में काले कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि हिंदू धर्म में इन्हें नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसके स्थान पर पीले, लाल या सफेद रंग के कपड़े पहनें। व्रत के दौरान किसी से झगड़ा, क्रोध या फिर किसी का अपमान न करें। इन सभी कार्यों से व्रत निष्फल हो जाता है।
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