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वरदा चतुर्थी आज, इस विधि से करें गणेश जी का पूजन, बप्पा हरेंगे सारे विघ्न

Published: Wed, 20 May 2026 07:00 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 20 May 2026 08:39 AM (GMT+05:30)

अधिक मास (मलमास) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को 'वरदा चतुर्थी' कहा जाता है, जो गणेश जी की कृपा पाने के लिए एक उत्तम दिन है।

वरदा चतुर्थी पर ऐसे करें गणेश जी की पूजा (Picture Credit: Freepik)

वरदा चतुर्थी पर ऐसे करें गणेश जी की पूजा (Picture Credit: Freepik) 

HighLights

  1. अधिकमास में मनाई जाती है वरदा चतुर्थी

  2. यह गणेश जी की कृपा पाने का उत्तम दिन है

  3. वरदा चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी बुधवार 20 मई को वरदा चतुर्थी मनाई जा रही है। माना जाता है कि इस दिन पर पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से साधक को सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। चलिए पढ़ते हैं वरदा चतुर्थी की पूजा विधि मंत्र और आरती, ताकि आपकी पूजा में किसी भी तरह की बाधा न आए।

गणेश जी की पूजा विधि

  • वरदा चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • अपने घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें और इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी पर गणपति जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और साथ में मंगल कलश रखें।
  • गणेश जी की मूर्ति को दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण (पंचामृत) से स्नान कराएं, फिर साफ जल से स्नान कराएं।
  • बप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन का तिलक, धूप-दीप और फूल अर्पित करें।
  • पूजा में गणेश जी की सबसे प्रिय दूर्वा (दूब घास) जरूर चढ़ाएं।
  • गणेश जी को मोदक और गुड़ का भोग लगाएं।
  • गणपति जी के मंत्रों का जप करें और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आरती गाएं।
  • अंत में सभी लोगों में प्रसाद बांटें।
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वरदा चतुर्थी शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यता के अनुसार, चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक या अपयश का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए इस तिथि पर चंद्रमा देखने से बचें। वरदा चतुर्थी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहेगा -

  • चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 10 बजकर 56 मिनट से सुबह 11 बजकर 6 मिनट तक
  • एक दिन पूर्व, वर्जित चंद्र दर्शन का समय - दोपहर 2 बजकर 18 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक (19 मई)
  • वर्जित चंद्र दर्शन का समय - सुबह 8 बजकर 43 मिनट से सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक
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(Picture Credit- AI Generated)

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी।

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

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