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समय को मापने के दो तरीके, यहां जानें हिंदू पंचांग और ग्रेगोरियन कैलेंडर का महत्व

Published: Fri, 27 Mar 2026 08:00 AM (IST)Updated: Fri, 27 Mar 2026 08:17 AM (IST)

ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य पर आधारित है। वहीं, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर आधारित है।

Calendar: समय को मापने के दो तरीके। Ai Generated Image

Calendar: समय को मापने के दो तरीके। Ai Generated Image

HighLights

  1. अंग्रेजी कैलेंडर पूरी तरह से सूरज की चाल पर टिका है

  2. हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर आधारित है

  3. इन दोनों कैलेंडरों में दिन की शुरुआत को लेकर भी अंतर है

दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। जब से इंसानी सभ्यता की शुरुआत हुई, तभी से समय को मापने की जरूरत महसूस होने लगी थी। इसी जरूरत की वजह से दुनिया के अलग-अलग कोनों में कई तरह के कैलेंडरों ने जन्म लिया। आज के इस आधुनिक दौर में हम अपनी सहूलियत के लिए मुख्य रूप से दो तरीकों का पालन करते हैं। पहला है 'ग्रेगोरियन कैलेंडर', जिसे हम अंग्रेजी कैलेंडर भी कहते हैं, इसका उपयोग ऑफिस के कामों और दुनिया भर के व्यवसाय के लिए किया जाता है।

दूसरा है हमारा 'हिंदू कैलेंडर' यानी पंचांग, जो हमारे रीति-रिवाजों और आध्यात्मिक जीवन का असली आधार है। इन दोनों कैलेंडरों के बीच का फर्क सिर्फ तारीखों का नहीं है, बल्कि यह समय को देखने के दो अलग-अलग वैज्ञानिक नजरियों का है।

Calender 2

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गणना का आधार: सूर्य बनाम चंद्रमा

अंग्रेजी कैलेंडर पूरी तरह से सूरज की चाल पर टिका है, इसलिए इसे 'सोलर कैलेंडर' भी कहते हैं। इसमें पृथ्वी को सूरज का एक पूरा चक्कर लगाने में जितना समय लगता है, उसे ही एक साल माना जाता है। असल में यह समय 365 दिन, 5 घंटे और करीब 49 मिनट का होता है। इसी समय को बराबर करने के लिए हर चार साल में एक 'लीप ईयर' रखा जाता है, ताकि समय का तालमेल बिगड़े नहीं। दूसरी ओर, हमारा हिंदू कैलेंडर मुख्य रूप से चंद्रमा की घटती-बढ़ती कलाओं पर आधारित है। इसमें एक महीना अमावस्या से लेकर अगली अमावस्या तक गिना जाता है, जो करीब साढे 29 दिनों का होता है। यही वजह है कि हिंदू कैलेंडर के एक साल में केवल 354 दिन ही होते हैं।

तिथियों का घटना-बढ़ना और अधिक मास का विज्ञान

चंद्र वर्ष और सूर्य के वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का फर्क होता है। मौसमों के साथ इस अंतर को बराबर करने के लिए हिंदू पंचांग में बहुत ही सटीक और वैज्ञानिक तरीका अपनाया गया है। हर 32 महीने बीतने के बाद, पंचांग में एक फालतू महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे हम 'अधिक मास' या 'पुरुषोत्तम मास' के नाम से जानते हैं। यही वजह है कि होली, दीपावली और नवरात्रि जैसे बड़े त्योहार हर साल अंग्रेजी कैलेंडर की अलग-अलग तारीखों पर आते हैं, लेकिन अपने सही मौसम (जैसे वसंत या सर्दी) में ही बने रहते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, वहां समय को संभालने के लिए सिर्फ 'लीप डे' का सहारा लिया जाता है।

दिन का प्रारंभ और सूक्ष्म गणना

इन दोनों कैलेंडरों में दिन की शुरुआत को लेकर भी वैचारिक अंतर है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया दिन रात के 12:00 बजे से शुरू होता है, जिसका कोई ठोस खगोलीय आधार नहीं है। इसके विपरीत, हिंदू धर्म में दिन का प्रारंभ सूर्योदय से माना जाता है। पंचांग की गणना इतनी सूक्ष्म है कि इसमें केवल दिन और तारीख ही नहीं, बल्कि नक्षत्र, योग, करण और वार जैसी पांच महत्वपूर्ण जानकारियां (पंच-अंग) दी जाती हैं। यह सूक्ष्मता हमारे जीवन के सही संचालन और शुभ मुहूर्त निकालने के लिए अनिवार्य है, ताकि हम ब्रह्मांड की ऊर्जा का सही लाभ उठा सकें।

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लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।