हरिद्वार। वैदिक कर्मकांड अंतर्गत होने वाले पांच महायज्ञों में से एक श्राद्ध महायज्ञ (श्राद्ध पक्ष) में मंगलवार को प्रतिपदा का श्राद्ध किया। इस अवसर पर लोगों ने गंगा के विभिन्न घाटों से लेकर अपने घरों में पूर्वजों की शांति और तृप्ति के निमित पकाए हुए शुद्ध पकवान, दूध, दही, घी, मिष्ठान आदि का दान किया।

मंगलवार को पूर्वजों के पृथ्वी प्रवास का दूसरा दिन रहा। प्रतिपदा के श्राद्ध के लिए कुशावर्त घाट व नारायणी शिला पर भी स्थानीय लोगों से लेकर दूर दराज से आए लोगों की भीड़ रही। मंगलवार को पृथ्वी पर पूर्वजों के वास का दूसरा दिन रहा। विष्णु पुराण के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करने से पितृगण तृप्त हो प्रसन्न होकर समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इसलिए प्रतिपदा में जिस किसी के पूर्वजों की मृत्यु हुई थी, उनकी आत्म शांति और तृप्ति के लिए लोगों ने ब्राह्मणों को शुद्ध भोजन, वस्त्र, अन्न, दक्षिणा आदि देकर प्रसन्न किया। इसके अलावा पकाए भोजन में से गाय, कुत्तों, कौवों, चींटी और देवताओं के नाम से भी घरों में ग्रास निकाले गए। वहीं श्राद्ध कर्म की इस प्रक्रिया में भोजन के कुछ अंश को अग्नि देव को भी समर्पित करने की परंपरा है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए लोगों ने अपने घरों में पूर्वजों के मनपसंद पकवान, मिठाई, खीर आदि बनाकर उन्हें दान किया।

वहीं दूसरी ओर सुबह से ही गंगा के विभिन्न घाटों पर श्राद्ध कर्म करने वालों और स्नानार्थियों की भीड़ भी काफी लगी रही। मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में गंगा स्नान करने से सहस्त्र गुना फल मिलता है।

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