क्यों खास है जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा नील चक्र, भगवान विष्णु से क्या है इसका संबंध?
जगन्नाथ पुरी मंदिर का नील चक्र अष्टधातु से बना एक विशाल चक्र है, जिसे भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का ...और पढ़ें
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जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा नील चक्र (Picture Credit- AI)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जगन्नाथ पुरी का मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि ये अपने आध्यात्मिक कारणों से भी प्रसिद्ध हैं। यहां पर कई सारी ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में भक्त जानने के लिए व्याकुल रहते हैं। इन्हीं में से एक है यहां पर स्थित नील चक्र है जो इसका केंद्र बिंदु कहा जाता है। यह दिखने में दिव्य लगता है। साथ ही इससे मंदिर और सुंदर नजर आता है। आइए आपको इसके बारे में बताते हैं। साथ ही इसका वर्णन सही तरीके से करते हैं।
जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगा नील चक्र क्या है?
नील चक्र अष्टधातु (लोहा, तांबा, जस्ता, पारा, सीसा, पीतल, चांदी और सोना) से बना एक विशाल चक्र है, जो मंदिर के शिखर पर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग साढ़े तीन मीटर है और इसका वजन भी काफी ज्यादा होता है। इसी वजह से इसे मंदिर का मुकुट भी कहा जाता है, जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी स्थापना मंदिर के मुख्य निर्माण के समय की गई थी, और सदियों से यह उसी स्थान पर लगा हुआ है।
नील चक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
हिंदू धर्म में नील चक्र काफी अहम होता है। इसकी महत्तता सबसे ज्यादा होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि नील चक्र को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के रूप में देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं श्री विष्णु के अवतार हैं और यह चक्र उनके रक्षक के रूप में शिखर पर सजाया गया है।

पुरी के निवासी इस चक्र को भगवान विष्णु के दर्शन के रूप में देखते हैं, जो समस्त पापों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। नील चक्र मंदिर को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखता है और मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने में मदद करता है।
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नील चक्र आस्था का प्रतीक माना गया है। यह मंदिर के शिखर की सिर्फ शोभा नहीं बढ़ाता है, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा और विश्वास को भी जोड़े रखता है। ऐसा कहा जाता है कि इस चक्र को नमन किए बिना यह यात्रा पूरी नहीं होती है। इसलिए जो भी भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने जाता है। इस नील चक्र के प्रणाम जरूर करता है और यात्रा को पूरा करता है।
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