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Shabari Jayanti 2026: कब मनाई जाएगी शबरी जयंती? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Published: Thu, 05 Feb 2026 03:46 PM (IST)

शबरी जयंती (Shabari Jayanti 2026) हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक ...और पढ़ें

Shabari Jayanti 2026: शबरी जयंती का महत्व। (Ai Generated Image)

Shabari Jayanti 2026: शबरी जयंती का महत्व। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माता शबरी की भक्ति और प्रतीक्षा की मिसाल आज भी दी जाती है। फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती हर साल मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन (Shabari Jayanti 2026) पूजा-पाठ और व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही मनोकामनों की पूर्ति होती है। आइए इस तिथि से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

Shabari Jayanti 2026 Kab Hai

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शबरी जयंती कब है? (Shabari Jayanti 2026 Kab Hai?)

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 08 फरवरी को सुबह 02 बजकर 54 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 09 फरवरी को सुबह काल 05 बजकर 01 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल शबरी जयंती का पर्व 08 फरवरी 2026, दिन रविवार को मनाई जाएगी।

पूजा विधि (Shabari Jayanti 2026 Puja Vidhi)

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • मंदिर की सफाई करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और माता शबरी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं।
  • माता शबरी की कथा के अनुसार, उन्होंने चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाए थे। इसलिए पूजा में बेर का भोग जरूर शामिल करें।
  • घी का दीपक जलाएं, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
  • 'ॐ रामाय नमः' या 'जय श्री राम' मंत्र का जप करें।
  • इस दिन रामायण के शबरी प्रसंग का पाठ करें या सुनें।
  • अंत में आरती करें और पूजा में हुई सभी गलती के लिए मांगे।

शबरी जयंती का महत्व (Shabari Jayanti 2026 Significance)

माता शबरी का जीवन हमें सिखाता है कि भक्ति में जाति, वर्ण या धन का कोई स्थान नहीं है। उनके लिए भगवान राम केवल एक आराध्य नहीं, बल्कि उनका पूरा संसार थे। उन्होंने गुरु मतंग के वचनों पर यकीन कर सालों तक प्रभु राम का इंतजार किया कि वह एक दिन जरूर आएंगे। 'ईश्वर केवल भाव के भूखे हैं'। शबरी के जूठे बेर इसी का प्रमाण हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।