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सिर्फ 1 लोटा जल और बेलपत्र से क्यों प्रसन्न होते हैं महादेव? जानिए इसके पीछे का पौराणिक रहस्य

Published: Tue, 04 Aug 2026 10:26 AM (IST)

महादेव को सावन में जल और बेलपत्र क्यों प्रिय हैं, इसका पौराणिक रहस्य समुद्र मंथन से जुड़ा है। विषपान के ...और पढ़ें

शिव जी को प्रिय हैं भांग, धतूरा और कंदमूल? (Image Source: AI-Generated)

शिव जी को प्रिय हैं भांग, धतूरा और कंदमूल? (Image Source: AI-Generated)  

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सावन के महीने को अधिक पवित्र और शुभ माना जाता है। इस पूरे माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव जी की साधना करने से जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और प्रभु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं।

सावन में महादेव एक लोटा जल, बेलपत्र और कंदमूल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इससे शिव जी का आशीर्वाद बना रहता है। क्या आपने कभी सोचा है कि महादेव को सिर्फ कंदमूल, बेलपत्र और जल ही क्यों है पसंद। आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।

शिव जी का कंदमूल, बेलपत्र और जल से क्या है संबंध?

पौराणिक कथा के मुताबिक, अमृत प्राप्ति और सृष्टि की रक्षा के लिए जब समुद्र मंथन किया गया, तो उसमें से हलाहल नाम का विष निकला था। यह विष अधिक गर्म और शक्तिशाली था, जिसकी वजह से पूरी सृष्टि नष्ट होने लगी थी। सृष्टि की रक्षा के लिए महादेव ने इस विष का पान किया।

shivling puja  (6)

 

विष की वजह से उनके शरीर में अधिक गर्मी और जलन पैदा हो गई। इस स्थिति में देवी-देवताओं ने विष के ताप को शांत करने के लिए भगवान शिव पर जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित किया, जिसकी वजह से उनके शरीर का ताप कम हुआ। इसलिए महादेव को जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा अधिक पसंद है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव पर सावन में रोजाना जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा समेत आदि चीजें अर्पित करने से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं और मानसिक तनाव की समस्या दूर होती है। समुद्र मंथन की इस कथा का वर्णन भागवत पुराण अस्कंद 8, अध्याय 6 से 12 और विष्णु पुराण अंश 1, अध्याय 9 में मिलता है। 

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इन बातों का रखें ध्यान

  • शिवलिंग का अभिषेक करते समय ध्यान रखें कि जल चढ़ाने के लिए तांबे का लोटा का प्रयोग करें।
  • शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाते समय मुख उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस दिशा को महादेव का मुख्य द्वार माना जाता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि पूर्व, पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करके भूलकर भी शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहिए।
  • अभिषेक के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है।
  • इसके अलावा किसी के बारे में गलत न सोचें और वाद-विवाद न करें।
  • मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।