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ऋषि पंचमी 2026: आज के दिन हल से जुता अनाज छोड़ने की है परंपरा, क्या है सप्तऋषियों से जुड़ा रहस्य?

Published: Fri, 11 Sep 2026 08:03 AM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 12:13 PM (IST)

मान्यता के अनुसार, ऋषि पंचमी के दिन हल से उगा अनाज नहीं खाया जाता। जानिए सप्तऋषियों की पूजा का महत्व और भोजन के खास नियम।

ऋषि पंचमी की सरल पूजा विधि (AI-Generated Image)

ऋषि पंचमी की सरल पूजा विधि (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 'ऋषि पंचमी' के रूप में मनाई जाती है। इस बार यह खास पर्व 15 सितंबर 2026 के दिन पड़ रहा है। यह दिन इसलिए भी बेहद खास माना जाता है क्योंकि यह सप्तऋषियों के प्रति आभार जताने, आत्म-संयम अपनाने और जाने-अनजाने में हुई कोई भी भूल-चूक का प्रायश्चित करने का दिन है।

लेकिन, इस व्रत से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात इसका खान-पान का नियम है। मान्यता के अनुसार, इस दिन हल से जुते जमीन का अन्न नहीं खाया जाता है। चलिए जानते हैं इस दिन से जुड़ी मान्यताओं और महत्व के बारे में।

हल से उगा अन्न न खाने की खास वजह

ऋषि पंचमी का व्रत पूरी तरह से अहिंसा, दया और सात्विकता पर टिका हुआ है। पौराणिक मान्यता है कि, जब खेत में हल चलाया जाता है, तो मिट्टी के अंदर मौजूद कई छोटे-छोटे जीवों को बहुत नुकसान पहुंचता है। इसे अनजाने में हुई हिंसा और पाप ही माना जाता है। चूंकि, यह दिन ऋषियों की तपोभूमि और जीवों के प्रति दया-भाव को समर्पित है, इसलिए इस दिन हल से जुते अनाज (जैसे गेहूं या सामान्य चावल) से परहेज किया जाता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा कुछ न खाएं तो क्या खा सकते हैं। इस दिन हल से जुते अनाज की जगह कंद-मूल, फल और बिना हल चलाए उगने वाले समा या तिन्नी के चावल का सेवन किया जाता है। एक तरह से जैसा खाना हम व्रत के दिन खाते हैं ठीक वैसा ही खाना हमें इस दिन खाना चाहिए। हालांकि, इसमें थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की मान्यता है।

महिलाओं के लिए प्रायश्चित का पर्व

ब्रह्मांड पुराण और भविष्य पुराण में इस व्रत के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह दिन महिलाओं के लिए शारीरिक व मानसिक शुद्धि का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रजस्वला (पीरियड्स) के दौरान अनजाने में हुए नियमों के उल्लंघन के दोष से मुक्ति पाने के लिए महिलाएं यह व्रत रखती हैं।

ऋषि पंचमी की पूजा विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल पर चौकी स्थापित करके उस पर सप्तर्षियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ) और माता अरुंधती का फोटो रखें।
  • ऋषियों को जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित करें।
  • इसके बाद, सप्तऋषियों को जल से अर्घ्य दें और परिवार की सुख-शांति के साथ अपनी भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
  • फिर ऋषि पंचमी की व्रत कथा सुनें और शाम को केवल फलाहार या सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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