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संगति सिर्फ इंसानों की नहीं, बुरे विचारों की भी होती है; रामचरितमानस की ये सीख बदल देगी आपका जीवन

Published: Thu, 25 Jun 2026 02:00 PM (IST)

बुरी संगति केवल इंसानों की नहीं, बल्कि नकारात्मक विचारों की भी होती है। रामचरितमानस के अनुसार, बुद्धिमान व्यक्ति अधम विचारों से दूर रहते हैं। जानिए इसके पीछे का कारण

बुरे विचारों से दूर रहना क्यों हैं जरूरी? (Picture Credit- AI Generated)

बुरे विचारों से दूर रहना क्यों हैं जरूरी? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे घर में या अपने आस-पड़ोस में हमने कभी न कभी यह तो सुना ही होगा कि, बुरे लोगों की संगत से दूर रहो, 'क्योंकि जैसी संगत वैसी रंगत'। कहने का मतलब हमें उन लोगों से दूर रहना चाहिए जो लोग बुरे कर्मों में लिप्त रहते हैं, क्योंकि उनके नजदीक नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, बुरी संगति सिर्फ इंसानों से ही नहीं, बल्कि नकारात्मक विचार भी मनुष्य की बर्बादी कारण बनते हैं।

रामचरितमानस में काकभुशुण्डि जी ने गरुड़ भगवान को बेहद गहरी बात समझाई, सुन खगपति अस समुझि प्रसंगा,बुध नहिं करहिं अधम कर संगा।

हे पक्षीराज गरुड़ जी, एक बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अधम की संगत नहीं करता है।

अंग्रेजी अनुवाद- Listen o king of birds the wise never keep company with the wicked

अर्थात्- एक समझदार व्यक्ति कभी भी बुरे और घटिया लोगों के साथ नहीं रहता है। यहां घटिया साथ का मतलब बाहरी लोगों के साथ से ही नहीं है, बल्कि इसमें आपके मन के अंदर चलने वाले अधम विचार भी शामिल है। जैसे कि, आपके अतीत से जुड़े अपमान, भविष्य की चिंता और खुद पर विश्वास न करना।

अधम विचार क्या होते हैं?

अधम विचार से मतलब जो निम्न सोच रखने वाला, नीचता भरा काम करने वाला, दुराचारी, दुष्ट, बुरे से है। अब यह अधम खुद के विचार होते हैं। इसमें पूर्व में किसी के द्वारा किया गया अपमान, भविष्य की चिंता, सेल्फ डाउट यह सब अधम है, जो व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है और नीचे गिराने का काम करता है।

हम दिन इसी तरह के विचारों के साथ संगति करके बैठे रहते हैं और फिर खुद से शिकायत करते हैं कि, मेरे साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, मेरी तो किस्मत खराब है, मैं तनाव में हूं।

जैसी संगत वैसी रंगत

AI Image

बुरे विचारों की संगति छोड़े

लेकिन जो व्यक्ति अपने विवेक और बुद्धि का सही इस्तेमाल करता है, उसका विवेक जागृत हो जाता है। उसे पता है कि, इस दुनिया में आए हैं तो कीचड़ तो होगा ही और वो हर कीचड़ के बीच से गुजरता है, लेकिन उनसे प्रभावित नहीं होता। मनुष्य को कमल के फूल से सीखना चाहिए कि, जिस तरह कीचड़ में खिलने के बाद भी कमल धाग रहित होता है, ठीक उसी तरह मनुष्यों को भी अपने आपको गलत प्रभाव से दूर रखना चाहिए।

कुल मिलाकर बुरे लोगों का साथ छोड़ना बेहद आसान है, लेकिन जिस दिन आप बुरे विचारों की संगति छोड़ देंगे, उसी दिन आपकी जिंदगी बदल जाएगी।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।