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पर-निंदा सबसे बड़ा पाप क्यों; गॉसिप कैसे आपके जीवन में नेगेटिव असर दिखाती है?

Published: Fri, 03 Jul 2026 12:43 PM (IST)

चुगली करने से दूसरों का नहीं, बल्कि अपना ही नुकसान होता है और मन की शांति भंग होती है। शास्त्रों ...और पढ़ें

दूसरों की गॉसिप करने से क्या होता है? (Picture Credit: AI Generated)

दूसरों की गॉसिप करने से क्या होता है? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे आसपास ऐसे कई लोग मौजूद हैं, जिन्हें दूसरों के बारे में गॉसिप करना काफी पसंद है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, जब आप किसी और की गॉसिप करते हैं, तो आप उस इंसान का कुछ नहीं बिगाड़ रहे होते, बल्कि अपने ही दिमाग का सुकून नष्ट कर रहे हैं होते हैं।

जब कोई व्यक्ति खुद के जीवन से काफी असंतोष होता है, तो उसे दूसरों के बारे में चुगलियां करनी अच्छी लगती है। आखिर क्यों हमें दूसरों की बुराई नहीं करनी चाहिए और इससे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? आइए जानते हैं इसके बारे में।

रामचरितमानस उत्तरकांड के 11वें अध्याय में एक श्लोक है-

संत उदय संतत सुखकारी, बिस्व सुखद जिमि इंदु तमारी।
परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा, पर निंदा सम अघ न गरीसा।।

अर्थात्- संत का साथ हमेशा ही सुखकर होता है, जैसे चंद्रमा और सूर्य का उदय विश्व भर के लिए सुखदायक है। वेदों में अहिंसा को परम धर्म माना गया है और पर निंदा क समान भारी पाप कोई नहीं है।

क्यों किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए?

माना जाता है कि, जब हम किसी की बुराई करते हैं, तो अनजाने में हम उसकी सभी नकारात्मक ऊर्जा और खराब आदत को अवचेतन मन में जमा करते हैं। इससे हमारा ही मन भारी होता है। जिस भी इंसान की आप दूसरों से बुराई करते हो, उससे वो प्रभावित नहीं होता, बल्कि आपकी मन की शांति चली जाती है।

सभी धर्मों में किसी निंदा या चुगली करने खराब आदतों में शामिल है। इसे आध्यात्मिक मार्ग में एक बड़े बाधक के रूप में देखा जाता है। सृष्टि का संचालन कुछ नियमों पर चलता है, जैसे आप दूसरों को देंगे आपके पास घूमकर वही लौटेगा। निंदा हिंसक का भाव है, जिसे हिंदू शास्त्रों में पाप की श्रेणी में रखा गया है। किसी की बुराई या चुगली करने का मतलब ईश्वर की निंदा करना है।

पर निंदा करना क्यों हैं गलत

इससे बचने के उपाय

किसी की निंदा करने के आदत से बाहर निकलने का सबसे सर्वोत्तम उपाय है, पॉजिटिव बातचीत करना। हमें किसी की आदतों का मजाक बनाने की बजाए उसमें पॉजिटिव चीज ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए।

जब हम दूसरों के लिए अच्छा बोलेंगे, करेंगे या सोचेंगे तो हमारे साथ भी अच्छा होगा। और सबसे बड़ी बात हमारा मन और मस्तिष्क दोनों शांत रहेगा, जिससे हम एकाग्रता के साथ काम कर सकेंगे। तो अगली बार जब किसी के साथ गॉसिप या चुगली करें तो इस बात को मत भूलिए कि इससे उनका नहीं बल्कि आपका ही नुकसान होगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।