नई दिल्ली, जेएनएन। इस्‍लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमजान का चांद सोमवार की शाम को देखा जाएगा। 5 मई को भारत में चांद नहीं देखा गया। हालांकि, सउदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में चांद का दीदार किया गया। धार्मिक विद्वानों के अनुसार भारत में मंगलवार को पहला रोजा रखा जाएगा और इसी के साथ पवित्र रमजान माह की शुरूआत हो जाएगी। इस लिहाज से सोमवार को मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी। रोजेदारों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बीमार लोगों को रमजान में विशेष ख्‍याल रखने की जरूरत है।

खाड़ी देशों में रविवार को चांद दिखा पर भारत में नहीं
धार्मिक मान्‍यताओं के मुताबिक रमजान इस्‍लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है। रमजान माह को तीन अशरों में बांटा गया है। पहले अशरे में अल्‍लाह अपने बंदों पर रहमत की बारिश करता है। दूसरे अशरे में गुनाहों की माफी दी जाती है और तीसरे अशरे में अल्‍लाह अपने लोगों को दोजक की आग से निजात दिलाता है। मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक इस बार 5 मई को रमजान का चांद दिखना था लेकिन इसे भारत में नहीं देखा जा सका। जबकि सउदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में रमजान के चांद का दीदार किया गया। खाड़ी देशों में सोमवार को पहला रोजा रखा गया है। भारत में रमजान का पहला रोजा मंगलवार को रखा जाएगा।

तरावीह की नमाज के साथ रमजान की शुरुआत
उलेमाओं के अनुसार रमजान का चांद दिखने के बाद तरावीह की नमाज अदा की जाती है। पुरुषों को जमात के साथ मस्जिद में तरावीह की नमाज अता करनी चाहिए और महिलाओं को अपने घरों में तरावीह की नमाज का ऐतमाम करना चाहिए।

रूह और दिल को पवित्र करता है रोजा
मुस्लिम विद्वानों के मुताबिक रमजान के महीने में हर मुसलमान अपने मन और शरीर को पवित्र रखता है। रमजान में बुरी आदतों पर काबू करके अच्छे विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है। वह हर शख्स के साथ विनम्रता का व्यवहार करता है। रोजा हर उस शख्स पर फर्ज है जो बालिग होता है। जो शख्स जान बूझकर रोजा नहीं रखता है वह गुनाहगार होता है। अल्लाह के घर उसे हिसाब देना पड़ेगा।

एक नेकी का सवाब 70 गुना
उलेमा बताते हैं कि रमजान के महीने में जो शख्स एक नेकी करता है अल्लाह उसको 70 नेकियों का सवाब देते हैं। इसी तरह जो शख्स एक रुपये की जकात करता है उसे 70 रुपये के बराबर सवाब मिलता है। हर शख्स को अपनी जायज कमाई का 2.5 फीसद गरीबों को देना चाहिए। जकात जरूरतमंद लोगों को ही देनी चाहिए।

बीमार लोग लोग ध्‍यान दें
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्ति रोजे के दौरान कुछ सजगताएं बरतकर अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जो डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए दवाएं या इंसुलिन लेते हों, हाई और लो ब्‍लड प्रेशर के मरीज रोजा रखने से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य लें क्योंकि रोजे के दौरान दवाओं की खुराक एवं समय में परिवर्तन करना पड़ सकता है। यह जरूरी है कि आप दवाएं बंद न करें। इस दौरान दवा की बड़ी खुराक इफ्तार (सूर्यास्त भोजन) पर लें क्योंकि यह दिन का प्रमुख भोजन कहलाता है, सहरी (सुबह के भोजन) में दवा की खुराक कम करना ज्यादा लाभदायक है। 

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Posted By: Rizwan Mohammad