गया। पितृपक्ष के संयुक्त प्रथम व द्वितीय तिथि सोमवार को शहर से पश्चिमी दिशा में प्रेतशिला वेदी पर हजारों तीर्थयात्रियों ने पिंडदान किया। प्रेतशिला वेदी तक पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन श्रद्धा व विश्वास के आगे यहां सबकुछ नतमस्तक। प्रेतशिला पहाड़ी के शिखर पर स्थित वेदी पर पिंडदान का विधान इस मायने में महत्व रखता है कि गयाजी में प्रवेश करने पर यात्री को सर्वप्रथम फल्गु नदी में स्नान कर तर्पण एवं श्रद्ध करते हैं। तत्पश्चात प्रेतशिला जाकर चावल(भात) एवं घी का मिश्रित पिंड का दान करते हैं।

वायु पुराण में इस पिंडवेदी के बारे में वर्णित है कि सनातन धर्मावलंबी परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हो जाती है। तो यहां पिंडदान करने पर प्रेतयोनि से मुक्ति की राह आसान हो जाती है। सर्वप्रथम प्रेतशिला पहाड़ी के तलहट्टी में स्थित ब्रrाकुंड में पिंडदान को आए लोग स्नान व तर्पण किए। इसके बाद श्रद्ध में तिल, घी एवं मधु मिश्रित पिंड पितरों को देने के लिए 676 दुर्लभ सीढ़ियों से होते हुए वेदी पर पिंडदान किया। चटखीली धूप के बावजूद श्रद्धा में कमी नहीं दिख रही थी। वृद्ध व शारीरिक रूप से कमजोर पिंडदानियों के लिए यहां बहंगी यानि खटोला पर बैठ कर पहाड़ के शिखर पर जा रहे थे। इसके लिए उन्हें इस कार्य में लगे लोग किराया के रूप में स्वेच्छा से चार से पांच सौ रुपये दे दिया करते हैं। यहां नवादा जिले से आए पुरोहित संजय पांडेय राजस्थान के मंगलदीप गौड़ व उनकी प}ी सुभाषिणी गौड़ पिंडदान का कर्मकांड करा रहे थे। श्री पांडेय कहते हैं कि जो श्रद्धालु पहाड़ के शिखर पर स्थित वेदी तक नहीं जा पाते हैं। उन्हें पहाड़ की तलहट्टी में ही प्रतीकात्मक वेदी पर पिंडदान व जल तर्पण करने की इच्छा को पूरा कराते हैं। यहीं झारखंड राज्य की राजधानी रांची से पिंडदान को आए श्रद्धालु किशन लाल अग्रवाल बताते हैं कि भतीजा राकेश कुमार मित्तल जब सातवीं कक्षा में पढ़ रहा था। तो पानी में डूब जाने से उसकी अकाल मृत्यु हो गई थी। हम परिवार के लोग अपने भतीजे को प्रेतयोनि से मुक्ति के लिए यहां पिंडदान करने आए हैं। उन्होंने फल्गु नदी की गंदगी पर अफसोस जताते हुए कहा कि इस नदी के गंदे पानी में श्रद्ध व तर्पण से श्रद्धालुओं का मन कुंठित हो जाता है। प्रशासन व सरकार दोनों को चाहिए कि इस पवित्र नदी को स्वच्छ रखे।

इधर, प्रेतशिला के पास तीर्थयात्रियों के सहायतार्थ चिकित्सा शिविर में रहे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. अजित कुमार ने बताया कि शिविर के माध्यम से पहले दिन करीब 75 मरीजों ने लाभ उठाया। प्रेतशिला के पास सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले वजीरगंज थाना के अनि संतोष कुमार कहते हैं कि शाम छह बजने के पहले ही पिंडदानियों को यहां से सुरक्षित शहर की ओर वापस कराने में कई जवान तैनात हैं। यहीं पर मिले मेला स्थल के पदाधिकारी बनाए गए जिला उद्योग केन्द्र के पदाधिकारी एम. द्विवेदी यहां प्रदत्त की गई हर प्रकार की सुविधा यथा सुरक्षा, चिकित्सा, प्रकाश, साफ-सफाई व जलापूर्ति व्यवस्था का निरंतर मॉनेटरिंग करते मिले।

Posted By: Preeti jha