कुंभ स्नान का महत्व

एेसी मान्यता है कि प्रयाग में जब भी कुंभ होता है तो पूरी दुनिया ही नहीं बल्कि समस्त लोकों से लोग संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाने आते हैं। इनमें देवता ही नहीं ब्रह्मा, विष्णु आैर महेश यानि त्रिदेव भी शामिल हैं। कहते हैं ये सभी रूप बदल कर इस स्थान पर आते हैं। त्रिदेवों के बारे में तो प्रसिद्घ है कि वे पक्षी रूप में प्रयाग आते हैं। वैसे भी इस कुंभ का महत्व आैर भी बढ़ गया है क्योंकि अमावस्या जो मौनी अमावस्या के रूप में मनार्इ जायेगी, पर सोमवार पड़ रहा है आैर वो सोमवती अमावस्या भी बन गर्इ है। इस दिन भी शाही स्नान के अलावा सामान्य भक्त जनों का रेला उमड़ेगा आैर पुण्य लाभ प्राप्त करेगा।

कुछ लोग जो नहीं आ पाते

जाहिर है कि मन से हर भक्त यही चाहता है कि वह इन पुण्य अवसर का लाभ कमाये आैर अपने सभी पापों से मुक्त हो जाये। इसके बाद भी कर्इ लोग एेसे होते हैं कि परिस्थितिवश यहां नहीं पहुंच पायेंगे। एेसे लोगों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है। पंडित दीपक पांडे के अनुसार एेसे उपाय हैं जिनसे घर पर ही कुंभ स्नान के समकक्ष का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। इस वर्ष प्रयागराज में 15 जनवरी से लेकर 4 मार्च तक पूरे 50 दिन कुंभ मेला चलेगा। यदि आपको अवसर मिले तो आप इस दौरान कभी भी यहां जा सकते हैं आैर ना जा पायें तो भी परेशानी की बात नहीं है।

ये है उपाय

कुंभ ना जा पाने की स्थिति में सर्वप्रथम तो घर पर ही आस्था से युक्त सात्विक माहौल बनायें। ब्रह्म मुहूर्त में उठें, र्इश्वर को याद करें आैर कीतर्न सत्संग का लाभ उठायें। स्नान के पुण्य के लिए जल में 5 तुलसी दल, कुछ तिल,आैर कुश डालें आैर मां गंगा, यमुना आैर सरस्वती को प्रणाम करते हुए भगवान को स्मरण करते हुए स्नान करें। एक विशेष बात ये है कि स्नान करने के लिए बाल्टी से जल निकालने के लिए लोटे या मग्गे के स्थान पर कलश यानि कुंभ का प्रयोग करें तो अति उत्तम रहेगा। आप जल के पात्र में तुलसी आैर तिल के साथ गंगाजल आैर आंवला भी मिला सकते हैं। पूजा के बाद शिवलिंग की पूजा करें। सूर्य को प्रणाम करें आैर  श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। इसके साथ ही तिल से पकवान विशेष रूप से तिल के लड़डुआें का दान करें।

Posted By: Molly Seth

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