गया। गया में पिंडदान से पितरों को शांति तथा उत्तम लोक की प्राप्ति होती है। इस पर पूर्ण विश्वास है। वेद और पुराण भी इसकी पुष्टि करते हैं। व्यवस्था अति उत्तम है।

पितरों को मिलता मोक्ष-

राजस्थान झुनझुनों के पंडित परमेश्वर लाल शास्त्री कहते है कि गया में पितृ यज्ञ अर्थात पिंडदान, श्राद्ध श्रद्धा पूर्वक करने से सात कुल के पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ करनेवाले संतान को भी सांसारिक कर्म में जाने अनजाने में किए पाप का भी नाश होता है। उसका पुण्य फल सात जन्म तक प्राप्त होता है।

पितरों के लिए गयाधाम तीर्थ-

शिखर राजस्थान से आई पूनम अग्रवाल ने कहा कि गयाजी पितरों के लिए परम पवित्र तीर्थ है। पूर्ण विश्वास है कि यहां पितरों के निमित किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों को तो उत्तम लोक की प्राप्ति होती ही है साथ ही करने वाले का लोक-परलोक सुधरता है।

प्रशासन की अच्छी व्यवस्था-

जम्मू से तोता राम ने कहा कि वर्षो की इच्छा गयाधाम आकर पूर्ण हुई। 17 दिनों का श्राद्ध और तर्पण करने आए है। तीसरे दिन के कार्य से मन और शरीर में असीम आनंद की प्राप्ति हो रही है। प्रशासन की व्यवस्था बहुत अच्छी है।

पिंडदान में आस्था व विश्वास

हिमाचल प्रदेश के विलासपुर से काशीराम ने कहा कि बड़ी आस्था और विश्वास के साथ 17 दिनों का कर्मकांड करने आए हैं। आशा है पितरों का कल्याण होगा। तथा संतान का भी उनके आशीर्वाद से जीवन सुखमय होगा।

कर्मकांड में पूर्ण विश्वास-

हिमाचल प्रदेश के ककरार गांव से आए 11 वर्षीय दीपक अपने दादा जयराम के साथ 17 दिनों का श्राद्ध तर्पण करने आए है। बचपन में उनकी माता जी गुजर गई थे। माता के साथ कुल के अन्य पूर्वजों का भी कर्मकांड करेंगे। पूछने पर हंसते हुए कहते है कि मुझे यहां बहुत अच्छा लग रहा है।

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