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108 बार ही क्यों? 'ऊं नमः शिवाय' के जाप का वो रहस्य जो आपके सोचने का नजरिया बदल देगा

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:00 AM (IST)

'ऊं नमः शिवाय' मंत्र के महत्व और 108 बार जाप करने के लाभ पर बताया गया है कि कैसे यह ...और पढ़ें

रोजाना 108 बार ॐ नमः शिवाय का जाप (Picture Credits- AI Images)

रोजाना 108 बार ॐ नमः शिवाय का जाप (Picture Credits- AI Images)

HighLights

  1. 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का गहरा अर्थ और महत्व।

  2. 108 बार जाप से मिलती है मानसिक शांति, तनाव मुक्ति।

  3. यह मंत्र आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक विकास में सहायक।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हमारे जीवन में कई बार ऐसे मौके आते हैं जब मन बेचैन, बिखरा हुआ और ऐसी चीजों के बोझ से दबा होता है जिन पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता है। ऐसे समय पर कई लोग एक ऐसी चीज का सहारा लेते हैं जो काफी पुरानी है लेकिन काफी प्रभावी है, एक मंत्र।

सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है 'ऊं नमः शिवाय', जो भगवान शिव को समर्पित एक खास मंत्र है। माना जाता है कि रोजाना इस मंत्र का 108 बार जाप करने से मन के अंदर एक शांत लेकिन गहरा बदलाव देखने को मिलता है।

'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का असल मतलब

असल मायने में 'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का अर्थ है, 'मैं भगवान शिव को नमन करता हूं' या 'मैं अपने अंदर मौजूद दिव्यता का सम्मान करता हूं।' लेकिन इसका मतलब शब्दों से कहीं अधिक बढ़कर है। 'ऊं' ब्रह्मांडीय कंपन यानी खुद अस्तित्व की आवाज को दर्शता है, जबकि 'नमः' समर्पण की भावना को दर्शाता है और 'शिवाय' शुद्ध चेतना की तरफ इशारा करता है।

इस मंत्र का जाप करना केवल भक्ति का काम नहीं है, बल्कि खुद को अपनी व्यक्तिगत पहचान से कहीं ज्यादा बढ़कर अध्यात्म से जोड़ना है। इस मंत्र का जाप धीरे-धीरे आपको बाहरी दुनिया के शोर-शराबे से हटाकर अंदर की शांति की ओर ले जाता है।

108 बार मंत्र जपने से क्या फ़र्क पड़ता है?

108 नंबर कोई सामान्य नंबर नहीं है, बल्कि हिंदू और योग परंपराओं में इसका गहरा महत्व है। इस अंक को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। असल में 108 बार मंत्र जपने से एक लय बनती है।

इसमें आमतौर पर 15 से 20 मिनट का समय लगता है, जो मन को शांत करने और ध्यान की अवस्था में ले जाने के लिए काफी समय है। हर बार दोहराने पर मंत्र एक सूक्ष्म कंपन पैदा करता है, जो धीरे-धीरे आपके ध्यान को अंदर की तरफ खींचता है। यह सिर्फ बार-बार दोहराना नहीं है, बल्कि पूरी तरह से उसमें डूब जाना है।

आपके भीतर क्या बदलाव आने लगते हैं?

'ऊं नमः शिवाय' मंत्र का रोजाना अभ्यास करने पर यह मंत्र मन पर साफ तौर पर असर दिखाता है। लगातार दोहराने से मन का शोर शांत होता है, तनाव कम होता है और भावनात्मक स्थिरता आती है। जो विचार पहले बहुत भारी लगते थे उनकी तीव्रता कम होने लगती है, जिससे स्पष्टता और संतुलन के लिए स्थान बनती है। समय के साथ लगातार अभ्यास करने वाले लोग जीवन के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में बदलाव महसूस करते हैं।

बिना सोचे-समझे कुछ प्रतिक्रिया देने के बजाय एक ठहराव का एहसास होता है। एक शांत जागरूकता जो बेहतर फैसले लेने में मदद करती है। माना जाता है कि यह मंत्र नकारात्मक विचारों को शुद्ध करने का कम करता है। यह बदलाव धीरे-धीरे लगभग बिना पता चले महसूस होता है, जब तक कि एक दिन आपको ऐसा न लगने लगे कि आपके भीतर कुछ बदल गया है।

आध्यात्मिक रूप से माना जाता है कि यह मंत्र व्यक्ति को आत्म-साक्षात्कार की तरफ ले जाता है। यह समझ कि ईश्वर अलग नहीं है, बल्कि पहले से ही हमारे अंदर मौजूद है। यह कुछ मांगने के बारे में कम और अस्तित्व की एक गहरी अवस्था का अनुभव करने के बारे में ज्यादा है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।