शनि की साढ़ेसाती में नहीं रहेगा कष्ट का डर! बस कर लें ये 1 आसान गणेश उपाय, बदल जाएगी किस्मत
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए भगवान गणेश की पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती ...और पढ़ें

कैसे दूर करें शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की अवधि को जीवन का अधिक कठिन समय माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ज्योतिषी शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के समय भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने की सलाह देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से गणपति की साधना करने से शनि के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और जीवन में आ रही हर तरह की रुकावटें भी दूर होती हैं। आइए, एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी से जानते हैं कि भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कैसे आपके जीवन के लिए रक्षक बन सकती है।
श्री चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, जबकि भगवान गणेश सभी विघ्नों को हरने वाले विघ्नहर्ता हैं। जब किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव होता है, तो उसे मानसिक तनाव, कार्यों में रुकावट और आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
शनि दोष में गणेश पूजा का महत्व और लाभ
शनि जनित कष्टों में कमी: साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान नियमित रूप से गणेश जी की पूजा करने और उन्हें दूर्वा अर्पित करने से शनि जनित कष्टों में भारी कमी आती है।
सद्बुद्धि और सही निर्णय: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि ग्रह का संबंध अनुशासन से है और गणेश जी बुद्धि तथा सिद्धि के दाता हैं। गणेश जी की कृपा से जातक को सही निर्णय लेने की सद्बुद्धि मिलती है, जिससे कर्म में सुधार होता है।
विघ्नों का नाश: गणेश जी की आराधना से शनि देव प्रसन्न होते हैं। यह पूजा मानसिक शांति प्रदान करती है और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करती है।
क्या दान करें?
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम करने के लिए सरसों के तेल का दान करना शुभ माना जाता है। शनिवार के दिन स्नान और शनिदेव की पूजा-अर्चना करने के बाद, मंदिर में या जरूरतमंदों को सरसों के तेल का दान करें। इससे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है। इससे धन में वृद्धि होती है और जीवन में कोई कमी नहीं होती।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
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