इलाहाबाद। डिस्कोथेक-बार संचालक तथा रियल स्टेट कारोबारी सचिन दत्ता को महामंडलेश्र्वर सच्चिदानंद गिरि बनाने वाले निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि नासिक चले गए हैं। विवाद तूल पकड़ता देख उन्होंने बुधवार सुबह से अपना मोबाइल ऑफ कर दिया। मठ बाघंबरी गद्दी से बताया गया कि महाराज जी नासिक चले गए हैं।

गुरु पूर्णिमा को सचिन दत्ता को संन्यास दिलाने के साथ-साथ भव्य समारोह में नरेंद्र गिरि ने उन्हें महामंडलेश्र्वर सच्चिदानंद गिरि के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया था। नईदुनिया के सहयोगी प्रकाशन दैनिक जागरण में सर्वप्रथम सचिन दत्ता का स्याह अतीत सामने आया तो मामला सुर्खी बन गया और महंत घिर गए आरोपों से।

आरोप तो यहां तक लगा कि सचिन को महामंडलेश्र्वर बनाने के लिए मोटी रकम ली गई है। नरेंद्र गिरि के धुर विरोधी अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने पूरी प्रक्रिया को ही सवालों में ला दिया और दावा किया कि सचिन महामंडलेश्वर हैं ही नहीं।

विवाद तूल पकड़ने पर महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्र्वर कैलाशानंद की गुजारिश पर सचिन दत्ता को महामंडलेश्र्वर बनाया है। फिलहाल सच्चिदानंद के नासिक कुंभ में जाने और धार्मिक कृत्य में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी गई है।

चरित्रहीन, अयोग्य व पाखंडियों के संन्यास लेने से सनातन धर्म की छवि धूमिल हुई है। अखाड़े बिना योग्यता को जांचे, परखे किसी को भी महामंडलेश्र्वर जैसी गरिमामय पदवी देकर धर्म का क्षरण कर रहे हैं। इससे सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हो रही है, साथ ही त्याग, तपस्या की परंपरा भी खत्म होती जा रही है। इस पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। यह कहना है गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती का।

Posted By: Preeti jha

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